डासना जेल में करीब एक महीने से बंद 24 साल के एक बंदी की मौत हो गई। जेल प्रशासन के मुताबिक एचआईवी और टीबी से पीड़ित बंदी 22 मार्च से जेल अस्पताल में भर्ती था और रविवार को तबीयत बिगड़ने पर उसे एमएमजी भेजा गया था। यहां उसने दम तोड़ दिया।
उधर, परिजनों ने पुलिस पर उसे झूठे मामले में जेल भेजने और जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। विजयनगर थाना क्षेत्र में रहने वाले 24 वर्षीय युवक को पुलिस ने आर्म्स एक्ट में बीते 6 मार्च को जेल भेजा था।
जेल अधीक्षक एसपी सिंह का कहना है कि 22 मार्च को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में तकलीफ हुई तो उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया। लैब टेस्ट में उसे टीबी और एचआईवी पाजिटिव की पुष्टि हुई।
रविवार सुबह उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। उधर, मृतक बंदी के भाई का कहना है कि एक फोन कॉल पर पुलिस ने गलती से उसके भाई को उठा लिया था।
शिकायतकर्ता के मना करने के बावजूद पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट में जबरन जेल भेज दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 मार्च से वह बीमार था तो जेल प्रशासन ने उन्हें क्यों नहीं बताया। रविवार सुबह फोन कर बताया गया कि उसकी तबीयत बिगड़ गई है।
उसका भाई तड़पता रहा, लेकिन डॉक्टरों ने कहने के बावजूद उसे प्राइवेट अस्पताल में रेफर नहीं किया। जेल प्रशासन ने रेफर करने के दस्तावेज ही तैयार नहीं किए थे। यही नहीं पोस्टमार्टम कराने के लिए भी वह कभी घंटाघर कोतवाली तो कभी मसूरी थाने के चक्कर लगाते रहे। सोमवार को पोस्टमार्टम कराकर शव उन्हें दिया गया।