त्योहार शुरू होते ही राजधानी में एक बार फिर कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा पनप गया है। पिछले कुछ दिन से लगातार सामने आ रहे चार हजार से अधिक मामलों के चलते लोगों को बेपरवाह बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग खुद को संक्रमण से सुरक्षित मान रहे हैं। इसलिए वह कोरोना से जुड़े सतर्कता नियमों का सही पालन नहीं कर रहे हैं। इससे पहले विशेषज्ञों की एक समिति ने कहा था कि सर्दी और त्योहारी सीजन की वजह से दिल्ली में रोजाना 14 हजार मामले सामने आ सकते हैं।
वहीं, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल की अध्यक्षता वाली नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की समिति ने भी रोजाना दिल्ली में 15 हजार मामले सामने आने की आशंका व्यक्त की है। डॉक्टरों के मुताबिक, ये उछाल त्योहारी सीजन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने के अलावा मास्क पहनने में लापरवाही बरतने का नतीजा है।
नई दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल के आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. एस चटर्जी का कहना है कि त्योहारी सीजन के साथ ही लोग बेपरवाह हो गए हैं। उन्हें लगता है कि कोरोना वायरस से वह सुरक्षित हैं, लेकिन पिछले हफ्ते त्योहार के चलते लोग खुलकर एक-दूसरे से मिले हैं, जिसकी वजह से उछाल सामने आ रहा है।
उनका कहना है कि अब दिल्ली के अस्पताल और डॉक्टर आगामी पीक से निपटने के लिए तैयार हैं। क्योंकि, पिछले दो पीक को लेकर चिकित्सीय वर्ग काफी कुछ जानकारी हासिल कर चुका है। लोकनायक अस्पताल की डॉ. रीतू सक्सेना का कहना है कि जो मरीज भर्ती हो रहे हैं, उनकी जल्दी छुट्टी हो रही है। तेजी से रिकवरी होने के चलते अब पहले की तरह बिस्तरों की कमी नहीं है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 23 से 25 अक्तूबर के बीच दिल्ली में क्रमश: 4048, 4116, 4136 मामले सामने आए। पिछली बार ये आंकड़ा 19 सितंबर को 4,000 के पार हुआ था, जिसके बाद से इसमें गिरावट आ रही थी। 26 अक्तूबर को 2832 और 27 अक्तूबर को 4853 और 28 अक्तूबर को 5673 संक्रमित मिले हैं। पहली बार दिल्ली में रोजाना संक्रमित मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा पांच हजार के पार पहुंचा है।