पीड़िता तोते की तरह घटना को बयान नहीं कर सकती। समय बीतने के साथ बयान में मामूली विरोधाभास आना स्वाभाविक है। यह टिप्पणी अदालत ने छेड़छाड़ के मामले में चार दोषियों को एक साल की सजा सुनाते हुए की।
साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने शादीशुदा महिला के घर में घुसने, छेड़छाड़ करने, धमकी देने व चोट पहुंचाने के मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक साल की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस राशि में 30 हजार रुपये की राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
अदालत ने कहा पीड़िता के बयान से साफ है कि दोषियों ने पीड़िता के साथ जबरदस्ती की। दोषियों ने मुंह बंद कर उसके कपड़े फाड़ दिए। अदालत ने पीड़िता के बयान में विरोधाभास की दलील को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि सब कुछ उसके दिमाग में फोटो की तरह जीवंत हो और वह तोते की तरह सभी बातें कोर्ट में बयान कर दे।
अगर पीड़िता काफी लंबे समय के बाद बयान देती है तो उसके बयान में मामूली विरोधाभास आना लाजिमी है। इस मामूली विरोधाभास को तरजीह नहीं दी जा सकती। अभियोजन के मुताबिक मामले में दोषी टुकुन दास, पवन कुमार, विनोद कुमार व देवकांत गिरी 14 सितंबर 2014 की रात पड़ोस में रहने वाली महिला के घर में घुसे थे। महिला को घर में अकेला पाकर उसके साथ दुर्व्यवहार व छेड़छाड़ की थी। इससे पहले महिला व विनोद के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था।