केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडरों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में बदलने में असमर्थता जताई है। सरकार ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि लिंग परिवर्तन के बाद नाम परिवर्तन कर दिया जाए।
हाईकोर्ट ने इस जवाब पर नाराजगी जताते हुए सरकार से पूछा कि आखिर ट्रांसजेंडरों के सरकारी रिकार्ड में नाम परिवर्तन करने में परेशानी क्या है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव के समक्ष दोनों ट्रांसजेंडरों ने अलग-अलग याचिका दायर कर सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम परिवर्तन करवाने की मांग की है।
अदालत ने सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय को शपथपत्र सहित स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि इस मुद्दे पर क्या कोई नियम है या नहीं। इसके लिए गजट में क्या प्रावधान है।
अदालत ने कहा कि कागज में लिंग परिवर्तन अलग बात है, यहां केवल नाम बदलने का मसला है। दोनों ने अदालत से इस बारे में जवाब दायर करने के लिए समय मांगा। जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अक्टूबर की तारीख तय कर दी।