पत्नी से अप्राकृतिक कृत्य के मामले को लेकर बलात्कार कानून में संशोधन में विसंगतियों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर कानून एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका में ऐसे पति को संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष दायर याचिका में तर्क रखा गया है कि वर्ष 2013 में धारा 375 (बलात्कार) में किया गया संशोधन गलत है।
इतना ही नहीं भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) भी असंगत है। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को भी जवाब दाखिल करने को कहा है।
याचिका में कानूनी समस्या का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि धारा 375 में अनिश्चितता है और यह अपवाद है कि संभोग या अपनी पत्नी के साथ एक आदमी द्वारा यौन कृत्य तब तक बलात्कार नहीं है जब तक उसकी आयु 15 वर्ष से कम न हो।