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'केंद्र सरकार करवा रही है अधिकारियों से राष्ट्रद्रोह'

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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि केंद्र सरकार अधिकारियों से राष्ट्रद्रोह करवा रही है। चुनी गई सरकार के आदेश नहीं मानने का आदेश उपराज्यपाल के माध्यम से जारी करवा रहे हैं।
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अधिकारियों को विद्रोही बना रहे हैं। आजादी से अब तक के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि राज्यपाल या उपराज्यपाल एक चुनी गई सरकार के आदेश रद्द कर दें। यह बातें सीएम ने सहकारी संघवाद और केन्द्र राज्य संबंधों पर चर्चा के दौरान कहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में भी 23 साल में पहले कभी नहीं हुआ। जब से हमारी सरकार बनी है, उपराज्यपाल कम से कम 30 आदेश व फैसले रद्द कर चुके हैं। केन्द्र और उपराज्यपाल के इस तरह के आदेश न सिर्फ राज्य के अधिकार में हस्तक्षेप है बल्कि न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में भी हस्तक्षेप है। चुनी गई सरकार अगर कुछ गलत करती है तो उसे रद्द करने का अधिकार सिर्फ न्यायपालिका के पास है।
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संसाधन बढ़ेंगे तो और ज्यादा कर जमा करके देंगे

अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल की नियुक्ति तीन व्यक्तियों पैनल के हिसाब से कराए जाने की मांग रखी। वहीं ममता बनर्जी ने कहा कि राज्यपाल निवास से समानांतर सरकार चलाए जाने का आरोप कई उदाहरण देकर लगाया।

उन्होंने कहा, राष्ट्रपति निर्वाचित होते हैं, राज्यपाल-उपराज्यपाल निर्वाचित नहीं हैं। फिर राज्यपाल या उपराज्यपाल चुगी गई राज्य सरकार के मुख्यमंत्री या मंत्रिमंडल के आदेश को रद्द क्यों करेंगे। ये दोनों तो नामित होते हैं या फिर कैबिनेट की तरफ से नियुक्त किए जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस हमारे पास नहीं इसलिए जवाबदेही नहीं है। चाहे कितने भी बलात्कार हो जाएं या हत्या हो जाएं। इनका क्या? जनता हमसे कहती है कि 67 सीट दे दी, अब और क्या दें। उल्टे पुलिस का इस्तेमाल हमारे ही विधायकों के खिलाफ किया जाता है।

साथ ही केन्द्र को 1.30 लाख करोड़ रुपये का कर देने पर दिल्ली को सोने की मुर्गी बताया। सोने की चिड़िया का गला मत घोंटो। हिस्सेदारी 325 करोड़ की बजाय 20 हजार करोड़ तो दो। संसाधन बढ़ेंगे तो और ज्यादा कर जमा करके देंगे। हमारी हिस्सेदारी बढ़ाओ।

राज्य मजबूत होंगे, तभी केंद्र मजबूत होगा

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार राज्यों को कमजोर करके कभी मजबूत नहीं बन सकता। राज्यों को ज्यादा ताकत देकर मजबूत करेंगे, तभी केन्द्र मजबूत होगा। संविधान में जो अधिकार राज्य व केंद्र को दिए गए हैं, उसमें दोनो हस्तक्षेप करेंगे तो नहीं चलेगा। दिल्ली में बैठकर देश नहीं चल सकता। पार्टी से ऊपर उठकर काम करना होगा।

ममता बनर्जी ने कहा कि संघीय व्यवस्था में राज्य व केन्द्र को संविधान में जो अधिकार की लक्ष्मण रेखा दी गई है, उसे पार नहीं करना चाहिए। केन्द्र सरकार ने एक मुख्यमंत्री के घर सीबीआई से छापा डलवा दिया। अगर चोर है तो करो, लेकिन क्या प्रधानमंत्री के घर मुख्यमंत्री छापा डलवाएगा तो ठीक रहेगा।

यह लोकतंत्र के भविष्य के लिए ठीक नहीं है, शिष्टाचार के खिलाफ है। वहीं उम्मीदवार पर चुनाव खर्च में पाबंदी और राजनीतिक दलों को छूट पर सवाल उठाए। कहा कि पानी के हॉर्स पावर की तरह पैसा बहाया जाता है।
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मोदी के स्वच्छता अभियान पर निशाना साधा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान पर निशाना साधा। ममता ने कहा, एक दिन झाड़ू लगाने से क्या सब साफ हो जाएगा?

ये सब पब्लिसिटी के लिए तो ठीक है, लेकिन सही में कुछ करना है तो खाने-नहाने की तरह रोज करना पड़ेगा। वहीं सीबीआई को स्वतंत्र करने की मांग भी मुख्यमंत्रियों ने की।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-एम) लेफ्ट का छत्तीस का आंकड़ा है लेकिन सहकारी संघवाद और केन्द्र राज्य संबंधों पर चर्चा के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार अरविंद केजरीवाल से एक ही दिन मिले। हालांकि दोनो एक साथ कांफ्रेंस में शामिल नहीं हुए लेकिन मुद्दा केंद्र का राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का ही रहा। मुद्दे पर रुख भी दोनों का एक जैसा ही रहा।
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