जूते फटे होने पर स्कूल में नौवीं के छात्र को रिवीजन टेस्ट देने से रोक दिया गया। अभिभावकों ने बृहस्पतिवार को डीएम से मुलाकात कर स्कूल पर कार्रवाई की मांग की है।
उधर, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बुधवार को स्कूल में कोई टेस्ट नहीं था। महज अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी। न्यायखंड-2 के रेजिडेंट्स ने भी स्कूल की मनमानी पर नाराजगी जताई है। डीएम विमल कुमार शर्मा का कहना है कि मामले की पड़ताल कराई जाएगी।
न्यायखंड-2 निवासी प्रीति भारती और मनोज भारती का बेटा आशुतोष वसुंधरा सेक्टर-3 स्थित वनस्थली पब्लिक स्कूल में नौंवी कक्षा का छात्र है।
अभिभावकों का आरोप है कि बुधवार को स्कूल प्रबंधन ने आशुतोष को गणित का रिवीजन टेस्ट देने से रोक दिया, क्योंकि उसके जूते फटे थे। छात्र को घर भेजने के साथ ही स्कूल ने फोन कर अभिभावकों को भी इसकी जानकारी दी।
अभिभावकों के अनुरोध को भी स्कूल प्रबंधन ने ठुकरा दिया। बृहस्पतिवार को अभिभावकों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की। मां प्रीति भारती ने बताया कि स्कूल ने कोई रिमाइंडर नहीं दिया, वरना पहले ही जूते ले आते।
वहीं, स्कूल की प्रिंसिपल शशि जैन ने कहा कि बुधवार को कोई परीक्षा या टेस्ट नहीं था। ऐसे में छात्र को टेस्ट देने से कैसे रोक सकते हैं। अभिभावकों को नए जूते दिलाने के लिए एक माह से कहा जा रहा था।
आखिर में हारकर छात्र पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। छात्र को योगा टीचर के साथ कैब में घर भेजा गया। अभिभावकों ने योगा टीचर के साथ भी अभद्रता की।
बच्चा उनके पास आने की स्वीकृति स्लिप पर भी अभिभावकों ने हस्ताक्षर नहीं किए। केवल अनुशासन कायम करने के लिए यह कार्रवाई की गई थी।
नए जूते पहन स्कूल गया आशुतोष
आशुतोष के पिता ने बुधवार रात ही उसके लिए नए जूते खरीदे। बृहस्पतिवार को वह नए जूते पहनकर स्कूल पहुंचा। मां प्रीति ने बताया कि उसका रिवीजन टेस्ट बृहस्पतिवार को लिया गया।