पुरानी दिल्ली के बाजारों में कभी प्रचार करने से प्रत्याशी घबराते थे। तंग गलियों के साथ मसाले की महक से परेशान होने की जगह अन्य जगहों पर ही प्रचार करना बेहतर समझते थे।
इसी तरह का एक वाकया दिवंगत केंद्रीय मंत्री सिकंदर बख्त के साथ घटा। चांदनी चौक से बख्त लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। 1980 के लोकसभा चुनाव के समय सोशल मीडिया भी नहीं था और ना ही मोबाइल।
जनसंपर्क का जरिया सिर्फ नुक्कड़ नाटक और घर-घर जाकर संपर्क बनाना होता था। मतदाता जब तक प्रत्याशी से मिल नहीं लेते थे तब तक वोट की गारंटी नहीं होती थी।
सिकंदर बख्त थोड़ा नफासत वाले नेता थे, जब वह चुनाव प्रचार के लिए पुरानी दिल्ली के गदोलिया रोड स्थित मिर्ची मार्केट पहुंचे तो पहला सवाल यही किया कि कहां लेकर आ गए। क्या मिर्ची से वोट मांगने के लिए बुला लाए। दूसरी जगह क्यों नहीं चलते हो।
बीच बाजार पहुंचते ही बख्त को मिर्ची के कारण छीकें आनी शुरू हो गई। दिक्कत बढ़ती देख हम सबने उनको बाजार से बाहर निकाला। इसके बाद दोबारा वह प्रचार के लिए व्यापारियों के बीच वोट मांगने नहीं पहुंचे।
(भाजपा नेता धर्मवीर शर्मा से बातचीत के आधार पर)