देश में कैंसर मरीजों की बढ़ती संख्या और इलाज में देरी की वजह से कैंसर मरीजों की मौत को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है।
इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं में स्तन, बच्चेदानी के मुंह के कैंसर और पुरुषों में मुंह एवं गले के कैंसर के रोगियों की पहचान के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। अभी तक देश में कैंसर मरीजों की वास्तविक संख्या के संबंध में अनुमान ही लगाया जाता रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम चलाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ बैठक हुई है। विशेषज्ञों से कैंसर की पहचान के लिए स्क्रीनिंग करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा गया है।
उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में दिशा-निर्देश आने के बाद राज्यों से बातचीत कर स्क्रीनिंग कार्यक्रम को लागू किया जाएगा। कैंसर की पहचान के लिए एम्स के चिकित्सक दिशा-निर्देश तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा पीजीआई चंडीगढ़, मुंबई के टाटा मेमोरियल और आईसीएमआर के विशेषज्ञों को भी स्क्रीनिंग के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा गया है।
कैंसर के लिए चलाया जाएगा स्क्रीनिंग कार्यक्रम
कैंसर
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि स्तन और बच्चेदानी के मुंह के कैंसर के लिए उन्हीं महिलाओं की स्क्रीनिंग की जाएगी, जिनकी उम्र 30 साल होगी। जबकि मुंह और गले के कैंसर की पहचान के लिए उम्र सीमा 40 साल तय की गई है।
हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से पान-मसाला और तंबाकू का सेवन कर रहा है, तो उसे स्क्रीन किया जाएगा। दिशा-निर्देश तैयार करने के बाद राज्यों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
राज्यों के चिकित्सक और आशा कार्यकर्ताओं को भी इस स्क्रीनिंग कार्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है, ताकि बड़े स्तर पर कैंसर के लिए स्क्रीनिंग कार्यक्रम चलाया जा सके। एम्स के पूर्व कैंसर रोग विशेषज्ञ और डीन डॉ. पीके जुल्का ने बताया कि महिलाएं सबसे ज्यादा स्तन कैंसर और पुरुष मुंह व गले के कैंसर से जूझ रहे हैं।
महिलाओं में बच्चेदानी के मुंह के कैंसर मरीजों की संख्या दूसरे स्थान पर है। डॉ. जुल्का ने बताया कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर में स्तन कैंसर मरीजों की संख्या ज्यादा है, जबकि ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में बच्चेदानी के मुंह के कैंसर की संख्या ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि 70 से 80 फीसदी कैंसर मरीज इलाज के लिए बीमारी के तीसरे और चौथे स्टेज में पहुंचते हैं, लिहाजा इलाज बेहद मुश्किल हो जाता है। इसकी वजह से मृत्यु दर भी बढ़ जाती है।