दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी इलाके में चल रही मौत की फैक्टरी में 43 लोगों की मौत के बाद भी इमारत अब भी धधक रही है। आग कितनी जबरदस्त थी इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि घटना के 24 घंटे बाद भी अचानक सुबह पौने आठ बजे बिल्डिंग में एक बार फिर से आग लग गई।
हालांकि तुरंत ही आग पर काबू पा लिया गया। हादसा कैसे हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अब इन सवालों का जवाब तलाशने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
सोमवार को हादसे के 24 घंटे बाद भी अनाज मंडी इलाके में अफरातफरी का माहौल बना हुआ था। फिलहाल कौतूहल में लोग एक बार उस फैक्टरी को जरूर देखना चाहते थे जिसमें हादसा हुआ। दिनभर जांच एजेंसियां हादसे वाली बिल्डिंग से साक्ष्य जुटाने में लगी रहीं। हादसे के बाद सोमवार को अनाज मंडी इलाके की सभी दुकानें व फैक्टरी बंद रहीं।
सोमवार को दिन निकलते ही घटना स्थल के पास आम लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। भीड़ बड़ी तो घटना स्थल के पास पुलिस को भी तैनात कर दिया गया।
तीनों इमारतों में आने-जाने का एक ही रास्ता, हादसे के वक्त बंद था जीने का दरवाजा
सोमवार सुबह क्राइम ब्रांच की टीम जांच के लिए घटनास्थल पर पहुंची । टीम ने पूरी बिल्डिंग का मुआयना किया। एक अधिकारी ने बताया कि तीनों ही भाइयों की बिल्डिंगों में आने-जाने के लिए मुख्य द्वार पर एक शटर लगाया हुआ था। वहां से एक जीना ऊपर चढ़ता है जो 200-200 गज की तीनों बिल्डिंगों में जाता है। ऐसे में आग लगने के बाद मजदूरों के लिए बचने का कोई रास्ता नही मिला।
जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसे के समय ऊपर जीने का दरवाजा भी बंद था। ऐसे में मजदूर अपने-अपने फ्लोर पर जाल में फंस गए और भाग भी नही पाए। अपराध शाखा ने घटना स्थल से कई मजदूरों के मोबाइल, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व अन्य सामान कब्जे में लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिल्डिंग में प्लास्टिक और बैग के अलावा फोम भी रखा हुआ था। आग से बिल्डिंग में रखे महज 30 फीसदी सामान को नुकसान हुआ है। यदि सारे सामान में आग लगती तो उसकी चपेट में आसपास की इमारतें भी आ सकती थीं। दोपहर करीब 12.25 बजे उत्तरी दिल्ली नगर निगम की आयुक्त वर्षा जोशी व डीसी (उपायुक्त) वेदिका रेड्डी घटना स्थल पर मुआयना करने पहुंचीं।
हालांकि उन्होंने काफी दबाव बनाने के बाद भी मीडिया के सवालों का जवाब नही दिया। वहीं दोपहर करीब 12.45 बजे हादसे की जांच के लिए दिल्ली एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि टीम रविवार को भी आई थी, लेकिन इमारत के गर्म होने के कारण साक्ष्य जुटाने अंदर नहीं जा सकी।
मजदूरों का हंगामा
हादसे के बाद सभी फैक्टरी मालिकों ने अपनी फैक्टरी बंद कर मजदूरों को वहां से भगा दिया था। हादसे के बाद सोमवार को भी फैक्टरी मालिकों ने मजदूरों को फैक्टरी में आने नही दिया तो इन लोगों ने सुबह 11.30 बजे रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी के गेट पर हंगामा कर दिया।
इन लोगों का कहना था कि पूरी रात इन लोगों ने यहां वहां बैठकर गुजारी। वह फैक्टरी में ही रहते हैं और वहीं पर काम करते हैं। उनके कपड़े व अन्य सामान फैक्टरी में बंद है। ऐसे में अब वह कहां जाएंगे।