मुशर्रफ ने सात मिनट तक मुझसे फोन पर बात की थी, उसकी तड़प और पुकार मेरे कानों में गूंज रही है। वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था। हम दोनों ही एक दूसरे का हर कदम पर साथ देते थे। उसने अपने अंतिम पल में मुझे अपने परिवार की जिम्मेदारी सौंपी है। मैं मरते दम तक उसके परिवार और बच्चों की सुरक्षा करूंगा।
यह कहना है शोभित अग्रवाल उर्फ मोनू का। बीते रविवार मुशर्रफ की सामने आई कॉल रिकॉर्डिंग के बाद सोमवार को शोभित अपने दोस्त का शव लेने के लिए लोकनायक अस्पताल पहुंचा। यहां उन्होंने अपने मन की पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि अब तक उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके दोस्त के परिवार के लिए मदद की कोई घोषणा नहीं की है। वे दोनों ही बिजनौर जिला निवासी हैं।