10 साल पुराने वाहनों पर रोक के फैसले का असर पुरानी कारों के बाजार पर दिखने लगा है। एनजीटी के आदेश से पुरानी कारों की बिक्री ठप पड़ गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने तीन दिन पहले दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने वाहनों पर रोक लगा दी है।
इससे 2005 के पहले की गाड़ियों की बिक्री तो बिल्कुल बंद हो गई है। साथ ही 2005 के बाद की कारों पर भी इसका असर दिख रहा है। जिन कारों को 10 साल पूरा होने में तीन से चार साल बाकी हैं, उनको भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
इससे इन गाड़ियों की कीमतों में भारी गिरावट आई है। कार डीलरों के मुताबिक, जो बीएमडब्ल्यू अब तक 12-15 लाख में बिक जाती थी, वो अब एक लाख में बिक रही है।
एक लाख में भी नहीं बिक पा रही हैं गाड़ियां
डीलरों के मुताबिक सफारी, स्कॉर्पियो, जाइलो, स्विफ्ट डिजायर, स्विफ्ट वीडीआई जैसी गाड़ियों की काफी मांग रहती थी, मगर आदेश के बाद से पुरानी कारों के खरीदार गायब हो गए हैं।
तीन से पांच लाख रुपये तक में बिक जाने वाली ये 10 साल पुरानी गाड़ियां अब एक लाख रुपये में भी नहीं बिक पा रही हैं। फर्स्ट च्वाइस के डीलर ने बताया कि जिन गाड़ियों को 10 साल पूरा होने में तीन से चार साल बाकी है।
उनकी कीमत भी 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक कम हो गई है। आने वाले दिनों में कीमत और भी कम होगी।
रीसेल न होने से सहमे खरीदार
सेक्टर-10 स्थित कार ट्रेड के डीलर एसके जिंदल बताते हैं कि अब तक खरीदार पुरानी कार खरीदते वक्त ये सोचते थे कि दो-तीन साल कार चलाने के बाद बेच देंगे। इससे ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
अब 10 साल पुरानी होने के बाद गाड़ियां कबाड़ी के भाव में ही बिकेंगी, इसलिए वे छह-सात साल पुरानी कारों को भी खरीदने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाना चाहिए। सबसे पहले यूरो-वन, उसके बाद यूरो-टू और फिर यूरो तीन मानक वाले वाहनों को बंद किया जाना चाहिए। इससे डीलर और खरीदार दोनों को वक्त मिल जाएगा।
बाहर ठीक भी नहीं हो पाएंगी महंगी कारें
एसके जिंदल ने करोलबाग के डीलरों से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि दस साल पुरानी बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कारें अब तक 12 से 15 लाख में आसानी से बिक जाती थीं। अब एक-दो लाख में ही मुश्किल से बिक रही है।
करोलबाग के पुराने कार बाजार का यही हाल है। जिंदल के मुताबिक, अगर महंगी कार को कहीं एनसीआर के बाहर भी ले जाया जाए तो वह खराब होने पर ठीक भी नहीं हो पाएगी। एनसीआर में ठीक कराने आए तो जब्त हो जाएगी। ऐसी कार को लेकर कोई क्या करेगा। जिन लोगों ने तीन दिन पहले पुरानी कारें खरीदने के लिए देखी थीं, उन्होंने कह दिया कि अब कबाड़ की कीमत वाली कार को लेकर क्या करेंगे।
अब तक दिल्ली नंबर के वाहनों की सबसे ज्यादा रीसेल वैल्यू थी, मगर रोक लगने के बाद से इनकी रीसेल वैल्यू बहुत कम हो गई है। डीलर बताते हैं कि अब यूपी नंबर वाले वाहनों के खरीदार आने लगे हैं, क्योंकि दिल्ली व एनसीआर में ही 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगी है। उत्तर प्रदेश के बाकी शहरों में इन्हें चलाया जा सकता है।