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Delhi NCR News: दस साल में तीन गुना हुआ दिल्ली की अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ

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17.28 लाख मामले लंबित, जिला अदालतों में 8,575 स्वीकृत पदों में 1,711 खाली
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सचिन कुमार

नई दिल्ली। जिला अदालतों में पिछले दस साल में लंबित मुकदमों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है। साल 2016 में 6.06 लाख मामले लंबित थे, जो 2026 में बढ़कर 17.28 लाख पहुंच गए हैं। कर्मचारियों की कमी को इन मामलों के निपटारे में बड़ी बाधा माना जा रहा है, जहां करीब 20 फीसदी पद खाली हैं।
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के अनुसार, दिल्ली की सात जिला अदालतों में कुल 17,28,658 मामले लंबित हैं। इनमें करीब 15.09 लाख आपराधिक और 2.18 लाख सिविल मामले शामिल हैं। जिला एवं सत्र अदालत कर्मचारी कल्याण संघ ने बताया कि कुल 8,575 स्वीकृत पदों में से 1,711 पद खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों के कारण कर्मचारियों पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है। संघ ने दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
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संघ के महासचिव अरुण यादव ने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए स्वीकृत और खाली पदों का विवरण सामने रखा। जनवरी 2026 में साकेत कोर्ट के अहलमद कर्मचारी हरीश सिंह महार ने काम के दबाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद कर्मचारी संघ ने अदालतों में काम के बढ़ते दबाव और कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया था।

किसके कितने पद खाली

पद का नाम - स्वीकृत पद - रिक्त पद

वरिष्ठ न्यायिक सहायक - 709 - 277


कनिष्ठ न्यायिक सहायक - 1662 - 453


वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी - 10 - 10


प्रशासनिक अधिकारी (न्यायिक) - 50 - 45


वरिष्ठ निजी सहायक - 360 - 112

निजी सहायक - 1298 - 197

प्रोसेस सर्वर (प्रक्रिया सेवक) - 435 - 139


लंबित मुकदमों की संख्या

2016: 606181

2017: 717470

2018: 803080

2019: 848850

2020: 977909

2021: 1182853

2022: 1390751

2023: 1307501


2024: 1475727


2025: 1624377


2026: 1728658

नोट: यह आंकड़ा अगस्त 2026 तक का है।
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