थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए नियमित खून चढ़ाना एक जरूरत है लेकिन लोगों में इसके प्रति जागरूकता नहीं है। विशेषज्ञ ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा के लिए एडवांस डायग्नॉस्टिक तकनीकों के उपयोग में तेजी लाना चाहिए। इससे जांच तेज होगी और थैलेसीमिया के मरीजों की जरूरत को समय पर पूरा किया जा सकेगा।
थैलेसीमिया के मरीजों को खून चढ़ाने के दौरान होने वाली लापरवाही से एचआईवी संक्रमण तक हो सकता है। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए बृहस्पतिवार को दिल्ली में विशेषज्ञ जुटे। थैलेसीमिया पेशेंट एडवोकेसी ग्रुप के तरफ से 'सभी के लिए सुरक्षित रक्त सुनिश्चित करना: रक्त सुरक्षा के अभ्यासों को मजबूत करना' विषय विषय पर अपनी बात रखते हुए कोलकाता की थैलेसीमिया रोगी सुनेहा पॉल ने कहा अक्सर देश में लापरवाही के कारण संक्रमण के मामले सामने आते हैं। इन्हें जागरूकता से रोका जा सकता है। थैलेसीमिया के मरीज जिंदगी भर खून चढ़ाने के लिए बाधित होते हैं।
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चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा कि थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए नियमित खून चढ़ाना एक जरूरत है लेकिन लोगों में इसके प्रति जागरूकता नहीं है। ग्रुप की सदस्य सचिव अनुभा तनेजा मुखर्जी ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा के लिए एडवांस डायग्नॉस्टिक तकनीकों के उपयोग में तेजी लाना चाहिए। इससे जांच तेज होगी और थैलेसीमिया के मरीजों की जरूरत को समय पर पूरा किया जा सकेगा। वहीं, आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक प्रो. एन के गांगुली ने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार, मानकीकृत जांच और नियामक सतर्कता से सुविधाओं में सुधार लाया जा सकता है। इंडियन ब्लड ट्रांसफ्यूजन और इम्युनोहैमोटोलॉजी सोसायटी की महासचिव डॉ. संगीता पाठक ने कहा कि सुरक्षित रक्त आपूर्ति श्रृंखला का बहुत महत्व है। हमें ऐसी व्यवस्था को मजबूत करना होगा।