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नोएडा में बंदरों के आतंक से हड़कंप, तीन बच्चे जख्मी

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बिलासपुर कस्बे में शनिवार रात बंदर ने तीन बच्चों को काट कर घायल कर दिया है। बंदरों के आतंक से परेशान लोगों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।
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ग्रामीणों का कहना है कि दादरी से पकड़े बंदरों को ग्रेनो में छोड़ा गया। ग्रेनोे से पकड़े गए बंदरों को बिलासपुर में छोड़ दिया गया। बंदरों को जंगल में नहीं छोड़ने से इनका आतंक बढ़ रहा है।

बिलासपुर कस्बे में कटौती के चलते लोग घर की छतों पर सोने लगे हैं। नगर पंचायत कार्यालय के समीप रहने वाला बंदरों का एक झुंड लगातार लोगों को काट रहा है। खासतौर से महिलाओं और बच्चों को देखते ही काटने के लिए बंदर दौड़ता है।
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लोगों का कहना है कि एक बंदर खूंखार हो गया है। शनिवार रात में छत पर सो रहे प्रभात, जानी और अनूप को काट लिया। सवेरे तीनों को दनकौर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर नदीम ने बताया कि पिछले चार पांच दिन में बंदर ने बारह से अधिक लोगों को काट कर घायल कर दिया है।
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सुरक्षा के लिए देना पड़ रहा पहरा

बिलासपुर में लोग बंदर से दहशत में हैं। रात में लोगों को परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए पहरा देना पड़ रहा है। बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।

बंदरों को घुमा रहा प्रशासन, होगी जांच
एक साल पहले नगर पालिका परिषद ने वन विभाग से अनुमति लेकर मथुरा से टीम बुलाकर दादरी से 500 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से खर्च कर पकड़वाया गया था।

दादरी में बंदर पकड़कर ग्रेनो में छोड़ दिए गए। अचानक ग्रेनो में बंदरों का आतंक बढ़ने लगा तो प्राधिकरण ने तुरंत ही 2000 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से भुगतान कर छह माह पहले पकड़वाया।

ग्रेनो से बंदरों को पकड़कर बिलासपुर में छोड़ दिया गया। अब इन बंदरों से बिलासपुर के लोग परेशान हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि बंदरों के पकड़ने और छोड़ने के मामले की जांच की जाएगी। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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