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Delhi NCR News: सीजेपी के प्रदर्शन में समर्थन और विरोध के बीच गरमाया माहौल

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जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके के समर्थन में जुटे समर्थक, विरोधियों ने लगाए नारे
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान समर्थन और विरोध का अनोखा नजारा देखने को मिला। एक ओर पार्टी के समर्थक बड़ी संख्या में अपने नेता अभिजीत दीपके और उनकी नीतियों के समर्थन में जुटे, वहीं दूसरी ओर विरोधियों ने पार्टी के दावों और जनाधार पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी के कारण कई बार माहौल तनावपूर्ण हुआ, हालांकि पुलिस और आयोजकों की सतर्कता से स्थिति नियंत्रण में रही।

प्रदर्शन के दौरान सीजेपी समर्थकों ने पार्टी के पक्ष में नारे लगाए और इसे देश की राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में पेश किया। समर्थकों का कहना था कि युवाओं के बीच पार्टी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और सोशल मीडिया पर मिल रहा व्यापक समर्थन इसका प्रमाण है। जंतर-मंतर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि पार्टी छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा रही है।
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विरोधियों ने लगाए ‘जय श्री राम’ के नारे
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और अधिक गर्म हो गया जब विरोध करने वाले कई लोग मौके पर पहुंच गए। विरोधियों ने अभिजीत दीपके के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए, जिसके बाद कुछ समय के लिए वहां तनाव की स्थिति बन गई। विरोध में शामिल मनोज ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता दिखाना और वास्तविक जनसमर्थन हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं। उनके अनुसार जनता के बीच जाकर काम करना और लोगों की समस्याओं का समाधान करना ही किसी राजनीतिक दल की असली पहचान होती है। एक अन्य प्रदर्शनकारी राजेश ने कहा कि फॉलोअर्स और ऑनलाइन ट्रेंड से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता, इसके लिए जमीनी स्तर पर सक्रियता जरूरी है।
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सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
इस प्रदर्शन की चर्चा सोशल मीडिया पर भी दिनभर होती रही। कई यूजर्स ने पार्टी की जमीनी मौजूदगी पर सवाल उठाए, जबकि समर्थकों ने इसे बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया। एक यूजर ने प्रदर्शन को अपेक्षा से कमजोर बताया, जबकि समर्थक रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सीजेपी छात्रों की आवाज बनकर उभर रही है और उनके मुद्दों को मजबूती से उठा रही है। जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर सोशल मीडिया की लोकप्रियता और वास्तविक जनाधार के बीच के अंतर को चर्चा के केंद्र में ला दिया। समर्थकों ने इसे अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन बताया, जबकि विरोधियों ने इसे प्रचार आधारित राजनीति का उदाहरण करार दिया।
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