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Delhi NCR News: नौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में फरार कंपनी मैनेजर गिरफ्तार

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नकली वर्क ऑर्डर और फर्जी डिलीवरी रिकॉर्ड के जरिए ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स कंपनी को लगाया चूना, अदालत ने घोषित किया था भगोड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स कंपनी के करीब नौ करोड़ रुपये के गबन के मामले में फरार चल रहे आरोपी कर्मचारी सुभाष शर्मा को राजस्थान के ब्यावर से गिरफ्तार किया है। अदालत उसे पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी थी।
ईओडब्ल्यू के पुलिस उपायुक्त सुबोध गोस्वामी ने बताया कि बिगस्टॉक लॉजिस्टिक्स के निदेशक दर्शन बवेजा ने पिछले वर्ष नारायणा थाने में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार कंपनी विभिन्न ट्रांसपोर्टरों से ट्रक-ट्रेलर किराये पर लेकर अपने ग्राहकों को माल ढुलाई सेवाएं उपलब्ध कराती थी।
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जांच में सामने आया कि जयपुर कार्यालय में मैनेजर के पद पर कार्यरत सुभाष शर्मा ने कंपनी के विश्वास का दुरुपयोग करते हुए फर्जी ट्रांसपोर्ट सप्लायरों के नाम पर नकली वर्क ऑर्डर तैयार किए। उसने कंपनी से ट्रांसपोर्ट सेवाओं के लिए लगभग 80 प्रतिशत अग्रिम भुगतान जारी करवाया और फर्जी कारोबार दिखाकर करोड़ों रुपये हड़प लिए।
आरोप है कि शर्मा ने नकली इनवॉइस, मनगढ़ंत डिलीवरी रिकॉर्ड और फर्जी रसीदें तैयार कर कंपनी को सौंपीं। डिलीवरी दस्तावेजों में ऐसे वाहनों का उल्लेख किया गया जो एक मीट्रिक टन से अधिक भार वहन करने में सक्षम नहीं थे, जबकि रिकॉर्ड में उनसे 40 मीट्रिक टन माल की ढुलाई दर्शाई गई थी। इसके अलावा भुगतान के समर्थन में ऐसे बैंक खातों के चेक जमा किए गए जो या तो बंद थे या संबंधित ग्राहकों के नाम पर नहीं थे।
फर्जी सप्लायरों के खातों में भुगतान करवाने के बाद राशि निकाल ली
बैंकिंग लेन-देन की जांच में पता चला कि आरोपी ने फर्जी सप्लायरों के खातों में भुगतान करवाने के बाद राशि निकाल ली। पुलिस के अनुसार न तो ट्रक उपलब्ध कराए गए और न ही किसी प्रकार की वास्तविक माल ढुलाई हुई।
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लगातार ठिकाने बदल रहा था आरोपी
पुलिस के अनुसार 12वीं तक पढ़ा सुभाष शर्मा पिछले पांच वर्षों से कंपनी में कार्यरत था और इसी दौरान उसने कंपनी का भरोसा जीतकर कथित धोखाधड़ी को अंजाम दिया। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार ठिकाने बदलकर जांच से बचता रहा। गिरफ्तारी से बचने के कारण अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर ईओडब्ल्यू की टीम ने 18 जून को उसे राजस्थान के ब्यावर से गिरफ्तार कर लिया।
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