चांदनी चौक इलाके में शीश गंज गुरुद्वारा के बाहर प्याऊ को अदालत के आदेश के बावजूद न तोड़ने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी अपने हाथ में कानून लेता है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने बृहस्पतिवार को ही तोड़े गए प्याऊ को पुन: बनाने पर नाराजगी जताते हुए उसे तोड़ने का आदेश दिया था। अदालत ने उपराज्यपाल को निर्देश दिया है कि वे बैठक कर तय करे कि प्याऊ हेरिटेज स्थल पर है या फिर अवैध।
न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर व न्यायमूर्ति विभू बाखरू की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस व एमसीडी के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्याऊ को क्यों नहीं हटाया गया। हम लोगों को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दे सकते।
आम लोगों की प्रवृत्ति है कि अदालत के आदेश के बावजूद कुछ नहीं होगा। हम इस संस्कृति से छुटकारा चाहते हैं। खंडपीठ ने कहा कि हम कानून व्यवस्था की स्थिति को तोड़ना नहीं चाहते। अदालत ने कहा कि पुलिस यह नहीं कह सकती कि वह स्थिति पर नियंत्रित नहीं कर पाई।
अदालत की गरिमा और कानून के शासन को कायम रखने का मुद्दा बड़ा
चांदनी चौक में अतिक्रमण
- फोटो : अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
खंडपीठ ने स्पष्ट किया मुद्दा प्याऊ का नहीं है। हमारे लिए यह अदालत की गरिमा और कानून के शासन को कायम रखने का मुद्दा है। हमेशा ऐसी स्थिति नहीं होती कि हर कोई खुश हो। अदालत ने दिल्ली सरकार के उस तर्क पर कड़ी खिंचाई कि वहां प्याऊ निशुल्क जल पिलाने के लिए बनाया गया है।
अदालत ने सरकार से पूछा, क्यों नहीं आप उस क्षेत्र में निशुल्क पीने के पानी की व्यवस्था करते जहां आम नागरिकों को सख्त जरूरत है। अदालत ने कहा आप गुरुद्वारा या मंदिर और सड़कों पर लोगों के बीच भेद न करें। हमें खुशी होती यदि आप सभी पूरे चांदनी चौक क्षेत्र और दिल्ली के बाकी हिस्सों में सभी लोगों के लिए पीने का पानी उपलब्ध कराते। खासकर इस मौसम में हर किसी को पानी की जरूरत है।
अदालत ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (डीएसजीएमसी) की याचिका पर दिल्ली सरकार,लोक निर्माण विभाग और उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में तर्क रखा गया है कि वर्तमान स्थान पर बने प्याऊ के अलावा माई मतिदास चौक पर बने प्याऊ को नहीं तोड़ा जा सकता क्योंकि यह हेरिटेज श्रेणी में आता है। डीएसजीएमसी ने कहा कि इसे अवैध घोषित करने से पूर्व उन्हें सुना तक नहीं गया। इसके अलावा प्याऊ गुरुद्वारे के पिलर के बीच बना हुआ है।
प्याऊ बनाने से पूर्व क्या सरकार से इजाजत ली गई थी
चांदनी चौक में अतिक्रमण
- फोटो : अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
अदालत ने कहा कि वे तय करेंगे कि प्याऊ स्थल विरासत स्थल था या नहीं और प्याऊ बनाने से पूर्व क्या सरकार से इजाजत ली गई थी या नहीं। अदालत ने मामले की सुनवाई 12 मई तय की है। खंडपीठ ने चांदनी चौक क्षेत्र के सौंदर्यकरण के ध्यानार्थ सड़को व फुटपाथों से अवैध अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे।
बुधवार को एमसीडी ने गुरुद्वारे के बाहर बने प्याऊ को तोड़ दिया था जिसे पुन: बना दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्याऊ स्थल पर कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके व महासचिव मनजिंद्र सिंह सिरसा नहीं जाएंगे।
अदालत ने इन दोनों को अवमानना का नोटिस जारी किया था। उनके वकील द्वारा गुरुद्वारे का मुद्दा उठाने पर अदालत ने कहा कि हम उन्हें गुरुद्वारे जाने से नहीं रोक रहे लेकिन विवादित स्थल पर नहीं जा सकते। अदालत ने कमेटी के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि वहां यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया जाए।