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भाभी से दुष्कर्म करने वालों को ननद ने दिलाई सजा

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दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो दोषियों को दस साल कैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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पीड़िता अपने बयान से मुकर गई थी, लेकिन अदालत ने उसकी ननद के बयान, साक्ष्य और जांच के बाद यह फैसला सुनाया।

रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमसी गुप्ता ने 28 जुलाई 2014 के अपने फैसले में कहा कि इंदिरा विहार निवासी हरी राम और सुरेश ने पीड़िता से उसकी इच्छा के विरुद्घ दुष्कर्म किया, यह बात सबूत और बयान से साबित हो चुकी है।

पति के डर से ननद को बताया

एफआईआर में विलंब के आरोपियों के तर्क को कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि दुष्कर्म के बाद महिला डरी हुई थी, क्योंकि आरोपियों ने उसे जुबान न खोलने की धमकी दी थी।

पति के डर से उसने अपनी ननद को इस बारे में बताया। जिसके बाद रिपोर्ट दर्ज करवाई।

अभियोजन के मुताबिक पीड़िता एक फैक्ट्री में नौकरी करती थी। वहीं सुरेश भी नौकरी करता था। महिला ने दुष्कर्म की घटना से कुछ दिन पहले ही नौकरी छोड़ी थी।
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'पति ने आपत्तिजनक हालत में देखा था'

14 जून 2009 को आरोपियों ने फैक्ट्री बुलाकर उससे दुष्कर्म किया था। जिस मकान में फैक्ट्री थी, वह हरी राम का था। सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने बयान से मुकर गई।

उसने कहा कि सुरेश के साथ उसने सहमति से शारीरिक संबंध बनाया था और हरी राम ने उसके साथ कुछ नहीं किया। उसने यह झूठा मुकदमा दर्ज करवाया था, क्योंकि उसके पति ने उसे सुरेश के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता के पहले बयान की उसके ननद के बयान से पुष्टि होती है। इसके अलावा जांच में भी आरोपियों द्वारा उससे दुष्कर्म करने की पुष्टि हुई है।
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