ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ जंग-ए-आजादी की पहली लड़ाई में मेवात क्षेत्र के दस हजार से ज्यादा मेव क्रांतिकारियों ने शहादत दी। मेवात क्षेत्र से उठा चिंगारी 13 महीने तक सुलगती रही। बदौलत पूरे भारत में सन् 1857 का गदर मजबूत होता चला गया। इस मुहिम की शुरूआत आज ही के दिन मेवात क्षेत्र से हुई थी।
इस लड़ाई के बाद अंग्रेजी हुकुमत शाम ढ़लने से पहले ही मेवातियों के डर से दिल्ली के दरवाजे बंद करा देती थी। अलवर और फिरोजपुर झिरका रियासतों में 10 मई के दिन कई क्रांतिकारी शहीद हुए। उधर मेरठ से ा क्रांति का बिगुल बजा। पहली जंग-ए-आजादी में मेवात के लोगों ने कितनी यातनाऐं झेली। इस बात की जानकारी गुड़गांव गजटियर में मिलती हैं।
मेरठ के बाद मेवातियों ने अंग्रेजों को देश से भगाने की मन में ठानी। उन्हें उखाड़ फेंकने की योजना भी मेवात की धरती पर तैयार हुई। चंद गद्दारों ने इसकी खबर अंग्रेजी अफसरों तक पहुंचा दी। जिससे हजारों की संया में निहत्थे मेवाती क्रांतिकारी मारे गए।
गजटियर के मुताबिक मार्च 1858 को अंग्रेजों ने नगीना खंड़ के गांव घागस, कंसाली, सेल, नगीना, मांडीखेड़ा में जमकर कहर बरपाया। जिसमें घागस कंसाली के गरीबा मेव सहित 61 लोग शहीद हुए। वहीं 24 मार्च को घिरी मेव सहित 283 ने शहादत दी।
सरल गांव के हन्नू खां के अलावा 14 तथा फिरोजपुर झिरका में ईसराईल, केवलखां समेत 14 लोगों की जान गई। मांडीखेड़ा व नगीना कस्बे के उदयसिंह सांवत व 91 लोगों को फांसी चढ़ाया गया। इससे पहले 9 नवबर 1857 को घासेड़ों में 157 लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्हें फांसी पर लटकाया गया।
कुछ रोज बाद 19 नवबर को गांव रूपड़ाका में 425 मेवातियों को गोलियों से उड़ा दिया गया। जिला पलवल के होड़ल गढ़ी में किशनलाल व किशनसिंह सहित 85 लोग ओर हसनपुर में चांदखां व रहीम खां तथा सहसौला में फिरोजखां मेव समेत 12 लोगों को फांसी हुई।
बड़का मेव के खुशी खां सहित 12, नूंह में 18, तावडू में 19 और मंहू तिगांव में बदरूदीन समेत 73 लोगों ने अंग्रेजों से मुकाबला करते हुए शहादत पायी। शिक्षाविद्ध अब्दुल वाहब बताते हैं कि मेवातियों के बलिदान की खातिर ही आज देश चैन की सांस ले रहा है।
तभी तो मेवात की गंगा-जमुनी तहजीब की मिशाल दुनियाभर में दी जाती है। मेवात क्षेत्र वतनपरस्ती के लिए जाना जाता है। बुद्धिजीवी डॉ बशीर अहमद कहते हैं कि मेरठ से उठी चिंगारी का असर मेवात में सबसे ज्यादा देखने को मिला।
इसकी खास वजह थी मेवात का दिल्ली के नजदीक बसावट। सिरौली बाईसी के बड़े चौधरी सोहराब खां ने बताया कि दस हजार से ज्यादा शहीदों की जानकारी तो लिखित में है। पता नहीं कितने गुमनाम शहीद हैं। शहीदों की याद में जिलेभर में 13 मीनार भी बनी है।