अबकी बार राजधानी के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की काली दिवाली मनेगी। दिपावली से पहले वेतन न मिलने के कारण शुक्रवार को डॉक्टरों ने इसकी घोषणा की। साथ ही दिल्ली सरकार को गैर जिम्मेदार बताते हुए कहा कि हर महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य है।
बावजूद इसके शुक्रवार तक डॉक्टरों को वेतन नहीं मिला। चूंकि शनिवार और रविवार अवकाश पड़ गया और मंगलवार से दीपोत्सव शुरू हो रहा है। ऐसे में डॉक्टरों के पास त्योहार मनाने का सरकार ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा।
रेजीडेंट डॉक्टरों के संगठन फोर्डा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पकंज सोलंकी ने कहा कि अस्पतालों में अगर इलाज नहीं मिलता है तो डॉक्टरों को दोषी करार कर दिया जाता है। दवाएं नहीं है तो भी दोषी डॉक्टर होते हैं। मरीज का ब्लड टेस्ट नहीं होता तो भी उसके परिजनों का गुस्सा डॉक्टरों पर उतरता है। सरकार कोई फरमान जारी करती है तो वो भी डॉक्टर को लेकर भी होता है।
डॉ. सोलंकी का कहना है कि दिल्ली में डॉक्टरों के खिलाफ सरकार काम कर रही है। पहले ओपीडी का वक्त बढ़ाना और अब वेतन ही न देने से जाहिर होता है कि सरकार किस हद तक गैर जिम्मेदार ढंग से चल रही है। वहीं, कहा जा रहा है कि डॉक्टर वेतन न मिलने की वजह से काफी मायूस और गुस्से में भी हैं।