पुलिस ने हलफनामे में कहा कि शुरुआत में तीन पुलिसकर्मियों संजीव मलिक, देवेंद्र व पुष्पेंद्र को निलंबित किया गया था। अब सात और पुलिसकर्मियों को निलंबित कर सबके खिलाफ संयुक्त विभागीय जांच का आदेश दिया गया है।
मुखर्जी नगर मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद सिख समुदाय ने पुलिस कार्रवाई का कई दिन तक विरोध किया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मामले में चालक सरबजीत और दिल्ली पुलिस की ओर से दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। मामले पर अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त नजर रखे हुए हैं।
कोर्ट ने घटना का वीडियो देखने के बाद दिल्ली पुलिस से पूछा कि पुलिस एक बच्चे को सड़क पर घसीटकर कैसे पीट सकती है। इस घटना में शामिल तीन पुलिसवालों पर नहीं, बल्कि पूरे विभाग पर कार्रवाई होनी चाहिए। नाबालिग बच्चे से मारपीट करने वाले सभी पुलिसवालों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी पूछा था कि क्या इस मामले में कोई पड़ताल शुरू की गई है।
केंद्र सरकार उठा रही जरूरी कदम
खंडपीठ ने मामले से जुड़ी अधिवक्ता जोगेंद्र तुली की याचिका का बिना कोई आदेश दिए निबटारा कर दिया। तुली ने इस याचिका में खराब कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए दिल्ली पुलिस में अतिरिक्त जवानों की भर्ती का निर्देश केंद्र सरकार को देने की मांग की थी। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है। इस मुद्दे पर अलग से आदेश देने की जरूरत नहीं है।