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नोएडा उपचुनाव: जीत-हार की 10 खास बातें

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पूरे उत्तर प्रदेश में उपचुनावों में शानदार जीत दर्ज करने वाली समाजवादी पार्टी के लिए नोएडा की हार बड़ी किरकिरी बन गई। भाजपा की झोली में ये सीट जाने का मलाल सपा और कांग्रेस दोनों को होगा।
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सपा ने इस सीट पर चुनाव जीतने के लिए सारी ताकत झोंक दी थी। प्रदेश सरकार के कई कैबिनेट मंत्री यहां प्रचार के लिए आए और भाजपा के अस्तित्व को खत्म करने तक की बात कही लेकिन जब परिणाम आए तो सब कुछ एकदम उलटा हुआ।

उपचुनाव की मतगणना से लेकर जीत तक क्या-क्या हुआ जानिए खास 10 बातें:

1- कांग्रेस प्रत्याशी की अंतिम राउंड में बची जमानत
नोएडा उपचुनाव में जमानत बचाने के लिए 1,66,192 मतों के आधार पर प्रत्याशी को करीब 16,620 मतों की जरूरत थी। भाजपा, सपा और कांग्रेस प्रत्याशी को छोड़कर बाकी नौ प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
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हालत तो यह थी कि कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र अवाना की जमानत आखिरी राउंड में मिले वोटों के आधार पर बची। उन्हें 32 राउंड तक 16,113 वोट ही मिले थे। अंतिम राउंड में उन्हें 1099 मत मिले, जिससे उनकी संख्या दस प्रतिशत से अधिक 17,212 हो गई और वह अपनी जमानत बचाने में कामयाब हो गए।

2- नोटा रहा चौथी पसंद
उपचुनाव में शहर के 1846 लोगों ने सभी प्रत्याशियों को नकार दिया। पहले राउंड में ही 43 वोट नोटा के निकले। इसके बाद हर राउंड में 40 से 50 वोट नोटा को मिलते रहे। नौ प्रत्याशियों से अधिक लगभग 1.1 फीसदी वोट नोटा को मिले। नोटा शुरू होने के बाद से इस नोएडा विधानसभा उपचुनाव में इसका इतना अधिक लोगों ने उपयोग किया।

खदेड़े गए सपा कार्यकर्ता तो गायब रहीं प्रत्याशी

3- निर्वाचन अधिकारी से नोकझोंक
मतगणना के 26 राउंड होने के बाद तक सिर्फ 18 राउंड में ही प्राप्त मतों की घोषणा की गई। इसको लेकर भाजपा पदाधिकारियों की निर्वाचन अधिकारी राजेश यादव से नोकझोंक हो गई। भाजपा महानगर अध्यक्ष बिजेंद्र नागर ने निर्वाचन अधिकारी से जल्द घोषणा करने के लिए कहा। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सब कुछ पारदर्शी तरीके से हो रहा है।

4- सपा कार्यकर्ताओं को खदेड़ा
सपा कार्यकर्ता काफी संख्या में मतगणना स्थल पहुंच गए। इसके बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें वहां से खदेड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिनको हटाया गया वे बाउंसर की तरह दिख रहे थे।

5- नहीं पहुंचीं सपा प्रत्याशी
मतगणना स्थल पर जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों को नहीं जाने दिया गया। इसके चलते डिबाई विधायक गुड्डू पंडित और कैबिनेट मंत्री नारद राय को वहां से लौटना पड़ा। वहीं, मतगणना स्थल पर सपा प्रत्याशी काजल शर्मा नहीं पहुंचीं। यह बात चर्चा का विषय रही। परिवार की ओर से सुरेश शर्मा वहां मौजूद थे।

6- कांग्रेस प्रत्याशी ने दिखाई मदद की भावना
हार के बावजूद विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ताओं के लिए कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र अवाना ने मदद की भावना दिखाई। मतगणना स्थल पर पहुंचकर उन्होंने सभी को पानी पिलाया।
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कुछ यूं बढ़ता गया कार्यकर्ताओं का जोश

7- शुरू के पांच राउंड में दिखी जीत
राउंड वार बात करें तो पहले पांच चरणों में भाजपा प्रत्याशी ने अजेय बढ़त बना ली थी। पहले राउंड में जहां सपा को 928 व भाजपा को 3091 मिले। दूसरे राउंड में सपा को 1796 व भाजपा को 2840, तीसरे राउंड में सपा को 1406 व भाजपा को 3184, चौथे राउंड में सपा को 1943 व भाजपा को 2426 वोट मिले। वहीं, पांचवें राउंड में सपा को 509 व भाजपा को 3080 वोट मिले। खास बात यह थी कि पहले राउंड में सपा को जहां 928 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस को 1263 वोट मिले थे।

8- कम हुआ मतदान पर जीत भारी
उपचुनाव में कुल 1,66,192 वोट पड़े। यानी कुल मतदाताओं का 31.67 प्रतिशत वोटिंग हुई। वोटिंग दर कम होने से हार-जीत का फैसला काफी नजदीकी माना जा रहा था, लेकिन नतीजों ने सभी को चौंका दिया।

9- कार्यकर्ताओं का जोश चढ़ा परवान
हर राउंड में कमल खिलने के साथ ही फूलमंडी में मतगणना स्थल के बाहर खड़े कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ता गया। मोदी के नारों और कमल के झंडे के साथ मतगणना स्थल भी सराबोर रहा। वहीं, सपा कार्यकर्ता उम्मीद लगाए रहे कि आगे खुलने वाले राउंडों में पार्टी बढ़त बनाएगी लेकिन समय बीतते-बीतते उनकी उम्मीदें भी टूटती गईं। करीब एक बजे के बाद तो केवल भाजपा कार्यकर्ता ही फूलमंडी के बाहर दिखाई पड़े।

10- दिनभर बदलता रहा माहौल
फूलमंडी में मंगलवार सुबह से लेकर दोपहर तक अलग-अलग रंग दिखाई दिए। समर्थकों का उत्साह भी हर राउंड में परिणाम आने पर बढ़ता और घटता रहा। ईवीएम खुलने के साथ-साथ समर्थकों और कार्यकर्ताओं के चेहरे पर रंग बदलते गए। सुबह आठ बजे ही फूलमंडी पर भारी मात्रा में पार्टियों के समर्थक व प्रत्याशी मौजूद रहे।

फूलमंडी में तैनात पुलिसकर्मियों की नजरें मतगणना के दौरान स्कोर पता लगाने के लिए टीवी व अन्य साधनों को तलाशती रहीं। अधिकारियों की मौजूदगी में तैनात पुलिसकर्मी मोबाइल फोन के जरिये उम्मीदवारों की जीत और हार का पता लगाने की जुगत में लगे रहे।
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