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सरकारी एंबुलेंस में नहीं था ऑक्सीजन सिलिंडर, अस्पताल पहुंचने तक किशोरी की मौत

Tue, 25 Jun 2019 03:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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सरकारी एंबुलेंस में ऑक्सीजन के अभाव में बुखार पीड़ित एक किशोरी की मौत हो गई। कुसुम नामक इस किशोरी को बीके सिविल अस्पताल भेजा गया था। उसकी सांस फूल रही थी। इसके बावजूद उसे ऐसी एंबुलेंस में भेजा गया, जिसमें ऑक्सीजन का सिलिंडर ही नहीं था। ऐसे में बीके सिविल अस्पताल में इलाज शुरू होने से पहले ही किशोरी ने दम तोड़ दिया।

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बल्लभगढ़ के आजाद नगर में रहने वाली जुगेंद्री ने बताया कि उसकी 17 वर्षीया पुत्री को पिछले दस दिनों से बुखार था। इसी के कारण उसे बल्लभगढ़ स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह कुसुम की हालत अचानक बिगड़ने लगी। इसके साथ ही उसे सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। 

हालत बिगड़ती देख एम्स से उसे फरीदाबाद के सिविल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जुगेंद्री का आरोप है कि बीके सिविल अस्पताल तक जिस एंबुलेंस में कुसुम को लाया गया, उसमें ऑक्सीजन तक की सुविधा नहीं थी, जबकि डॉक्टरों को पता था कि उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इसके अलावा उस एंबुलेंस में कोई सहायक भी नहीं था। 
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किसी ने नहीं की मदद 
पीड़िता का आरोप है कि सिविल अस्पताल पहुंचने पर भी उसकी किसी ने मदद नहीं की। वह खुद ही बेटी को एंबुलेंस से उतारने लगी तो तेजपाल नामक एक मरीज ने ही उसकी मदद की। अस्पताल में परेशान जुगेंद्री ने बताया कि इमरजेंसी में जब वह बेटी को लेकर पहुंची तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने बताया कि उनके पास आने से पहले ही किशोरी की मौत हो चुकी थी।

उधर, एंबुलेंस सेवा प्रबंधक हरकेश डागर ने बताया कि प्रत्येक सरकारी एंबुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा है। उनका रिकॉर्ड बताता है कि जिस एंबुलेंस में कुसुम नामक मरीज को लाया गया था, उसमें ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध थी। इसके अलावा एक सहायक भी एंबुुलेंस में आया था। वेंटीलेटर सुविधा सिर्फ एक ही एंबुलेंस में है। हो सकता हो कि कुसुम को वेंटीलेटर की आवश्यकता रही हो।

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सरकारी अस्पताल में बाहर से दवा खरीदकर ला रहे मरीज

मरीजों को मुफ्त दवा के साथ सरकारी अस्पतालों में इलाज मुहैया का दावा करने वाली सरकार के वादों की असली तस्वीर बीके सिविल अस्पताल में देखने को मिल रही है। यहां न तो मरीजों को वक्त पर इलाज मिल रहा है न दवाएं। डॉक्टरी परामर्श के बाद जो दवाएं लिखी जा रही हैं वह सरकारी स्तर उपलब्ध ही नहीं है। 

सर्जरी के लिए घाव पर लगाए जाने वाले सॉल्यूशन तक मरीजों के तीमारदार से खरीदवाए जा रहे हैं। सिविल अस्पताल में सोमवार को केसर नाम की महिला का रसौली का ऑपरेशन किया गया। इस दौरान महिला के भाई रामबीर से डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए सर्जरी ब्लेड बीटाडीन और टेप मंगवाई। 

रामबीर का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में तैनात डॉक्टरों ने उससे करीब दो हजार रुपये के सामान बाहर से खरीदवाए। रामबीर ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में दाखिल सभी मरीजों के तीमारदारों को इसी तरह बाहर से दवा खरीदवाई गई। ज्यादातर तीमारदारों को पहली बारी में मंगाई गई दवा कम बताकर दोबारा वही दवाएं मंगाई गई। 

इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी गुलशन अरोड़ा का कहना है कि दवाओं के कुछ स्टॉक की कमी है। जरूरी दवाओं की खरीद स्थानीय स्तर पर पूरी की जाएगी। जिन दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। उन्हें भी जल्द ही मंगवा लिया जाएगा।
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