निर्भया के हत्यारों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया है। आरोपियों की दरिंदगी कोर्ट के सामने लाने में वसंत विहार पुलिस ने दिन-रात एक कर दिया था। निर्भया के शरीर पर दांतों के कई निशान मिले थे।
तत्कालीन एसआई प्रतिभा शर्मा के आदेश पर फोटोग्राफर ने गैंगरेप के चार दिन बाद यानी 20 दिसंबर, 2012 को दांतों के निशान के 10 बड़े फोटो खींचे थे। ये फोटोग्राफ कर्नाटक की धारवाड़ पुलिस ने एसडीएम कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस भेजे। इसके साथ ही पकड़े गए पांच आरोपियों के दांतों के मॉडल भी भेजे गए थे।
फोरेंसिक ओडोंटोलॉजी की तकनीक के जरिये आरोपियों के दांतों की बनावट और निर्भया के शरीर पर मिले दांतों के निशानों को मिलाया गया। एनालिसिस में 10 में से 4 दांतों के निशान की पहचान हो गई। इनमें से 3 निशान रामसिंह और 1 निशान अक्षय का था। इस पूरे घटनाक्रम में यह साक्ष्य दो आरोपियों की करतूत को उजागर करने के लिए काफी था।
निर्भया के शरीर पर मिले दांतों के निशानों के सुबूत जुटाने के लिए वसंत विहार पुलिस ने हर उस तकनीक का सहारा लिया, जिससे अपराधियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जा सके। इस आधार पर निर्भया के शरीर पर मिले दांतों के निशान का मिलान रामसिंह और अक्षय के दांतों से हो पाया। वसंत विहार पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसआई विशाल चौधरी दांतों के निशान के फोटोग्राफ लेकर विशेषज्ञों के पास पहुंचे थे।
पुलिस ने चीजों का बड़ी बारीकी से अध्ययन शुरू कर दिया था, लेकिन इसमें सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लोगों के दबाव से दूर रहकर एक निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था। जांच के लिए दोषियों के खिलाफ सुबूत तैयार करने के लिए डीएनए एनालिसिस भी किया था। वारदात वाली रात दोषियों ने जो कपड़े पहने थे, उनमें पीड़िता और उसके दोस्त के खून के निशान मिले।
मुख्य दोषी राम सिंह (मार्च 2013 में इसने जेल में आत्महत्या कर ली थी) की चप्पल पर भी पीड़िता के खून के निशान मिले थे। दोषियों ने पीड़िता और उसके दोस्त के कपड़े जला दिए थे। ऐसी कई कवायद पुलिस की ओर से भी की गईं, जो गुनाहगारों को उनके अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए काफी थे।