-केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित एनटीए को भंग करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
नीट-यूजी पेपर लीक, सीबीएसई कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन को लेकर हुई दिक्कतें सहित कई दूसरे मुद्दों को लेकर शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताया। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बुधवार दोपहर को अलग-अलग शिक्षकों के संगठन ज्वाइंट फोरम फॉर मूवमेंट ऑन एजुकेशन (जेएफएमई) ने प्रेस वार्ता की।
इसमें शिक्षा व्यवस्था में गहराते संकट को लेकर चिंता जाहिर की गई। जेएफएमई की अध्यक्ष नंदिता नारायण के अनुसार पेपर लीक, मूल्यांकन संबंधी विवाद और शिक्षा के बढ़ते केंद्रीकरण ने करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट में धकेल दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा व्यवस्था में अत्यधिक केंद्रीकरण किया गया। जिससे कई गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने में विफल रही है। नीट, यूजीसी-नेट, जेईई मेन और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं में सामने आए विवादों और पेपर लीक मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में कोचिंग संस्थानों, पेपर लीक गिरोहों और कुछ अंदरूनी तत्वों की मिलीभगत के कारण सार्वजनिक परीक्षाओं की साख कमजोर हुई है। केवल पुनर्परीक्षा या पुनर्मूल्यांकन जैसे कदम उठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि पूरे ढांचे में सुधार की आवश्यकता है। संगठन ने कक्षा 12 वीं सीबीएसई परीक्षाओं में लागू ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
सभी उत्तर पुस्तिकाओं का बिना शुल्क पारंपरिक तरीके से पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एनटीए को भंग करने, सार्वजनिक परीक्षाओं में निजी कंपनियों की भूमिका समाप्त करने, विश्वविद्यालयों और राज्यों की स्वायत्तता बहाल करने और पेपर लीक मामलों की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।