एक ओर जहां दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, अहमदाबाद, सोनीपत में भरपूर सुविधाओं में खिलाड़ी तैयार किए जा रहे हैं। वहीं, ग्रेटर नोएडा के खानपुर गांव में खिलाड़ी भाई-बहन ने गांव के बच्चों को तैयार कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाने की ठान रखी है।
अभावों के चलते अपने खेत में ही रेसिंग ट्रैक बनाकर गांव के बच्चों को एथलेटिक्स (दौड़) और खो-खो का प्रशिक्षण दे रहे हैं। गजब तो यह है कि बिना जूतों के राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दो लड़कों और एक लड़की ने चार स्वर्णपदक भी हासिल कर लिए।
खानपुर निवासी कपिल भाटी और उनकी बहन तनूजा भाटी गांव के बच्चों को खेलों में तराशने में जुटी हैं। इसके लिए दोनों ने एक और समकक्ष खिलाड़ी प्रीती सिंह को गांव के बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया है।
यहां बच्चों को प्रशिक्षण के लिए फीस नहीं ली जाती है। जो अक्सर समय निकालकर बच्चों को ताईक्वांडो का भी प्रशिक्षण देती हैं। कपिल भाटी केंद्रीय विद्यालय की ओर से एथेलेटिक (सौ मीटर और 1600 मीटर) और कबड्डी की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेल चुके हैं।
वहीं, प्रीति सिंह भी केवीएस की राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता खेल चुकी हैं। वहीं, प्रीति सिंह भी केवीएस की ओर से एथलेटिक्स और ताईक्वांडो प्रतियोगिता खेल चुकी हैं।
कपिल बताते हैं प्राधिकरण द्वारा खेलों के लिए एक जमीन दी गई है जो त्रिभुजाकर है। जिसमें प्रशिक्षण देना मुश्किल होता है। ऐसे में सरकार या प्राधिकरण उन्हें अगर सुविधा प्रदान करे तो यहां से बच्चे बड़े स्तर पर नाम रोशन कर सकते हैं।
दौडने के लिए न तो ट्रैक और न है जूते
ग्रेटर नोएडा में गरीब बच्चों के प्रशिक्षण के लिए ट्रैक उपलब्ध न होने का खामियाजा यहां के बच्चों को झेलना पड़ता था। स्वयं कपिल और उनकी बहन तनूजा ने अपने खेत में दो सौ मीटर का एक अस्थाई ट्रैक बनवाया हुआ है। जब फसल का समय नहीं होता है तो बच्चे इस ट्रैक पर दौड़ या कबड्डी का प्रशिक्षण लेते हैं। शाम चार बजे से लेकर सात बजे तक प्रशिक्षण दिया जाता है। पिछले छह महीने से बच्चों को यहां प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बिना जूतों के ही जीती प्रतियोगिता
कानपुर में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में तीन बच्चों ने चार स्वर्ण पदक जीते हैं। अस्थाई ट्रैक पर प्रशिक्षण के बाद गांव के अशीष भाटी ने अंडर-12 वर्ग में सौ मीटर फर्राटा रेस में स्वर्ण पदक जीता है।
वहीं, तेजा भाटी ने अंडर-10 स्पर्धा की सौ मीटर रेस में स्वर्ण जीता है। इसके अलावा अंजली ने अंडर-12 में सौ मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है। खास बात यह है कि तीनों खिलाडिय़ों ने बिना जूतों के ही स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है।
ग्रामीण अब सराह रहे कदम
पिछले दिनों पीवी संधू के ओलंपिक में रजत लाने पर जहां गांव में खेलों के प्रति रुझान बढ़ा है। वहीं, हाल ही में तीन बच्चों द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने पर ग्रामीणों का मन बच्चों के खेलों के प्रति रुझान पर बदला है। इससे पहले उनके माता-पिता खेलों के लिए मना कर दिया जाता था।
सोसायटी में गरीब बच्चों को मिल रही मुफ्त शिक्षा
ग्रेटर नोएडा की एवीजे हाइट्स सोसायटी में कुछ मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत लोग और यहां रहने वाली महिलाएं (गृहणी) अपना समय निकालकर गरीब बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराते हैं।
अमित कुमार, नवीन गुप्ता, अनामिका शर्मा, राहुल मौर्या, आशा सिन्हा, रंजीता सक्सेना आदि लोग सोसायटी के ए ब्लॉक के ग्राउंड फ्लोर पर खाली जगह में एक क्लासरूम जैसा बनाकर यहां आने वाले कर्मियों (घर में कार्य करने वाले, श्रमिकों आदि) के बच्चों को पढ़ाते हैं।
वहीं, चारों मित्र प्रत्येक शनिवार को प्राथमिक स्कूलों में जाकर बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा दी जाती है। इसके लिए जिलाधिकारी और बीएसए से अप्रूवल लेकर बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है।