कोरोना महामारी के दौर में वैसे तो सभी को सतर्कता बरतनी है, लेकिन टीबी (क्षय रोग) के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर उन मरीजों को जो पहले से ही फेफड़े की समस्या से जूझ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच टीबी के 28 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि पिछले छह माह में 1437 नए मरीज सामने आए हैं। जनवरी से मार्च के बीच पहली तिमाही में 821 मरीज आए, जबकि अप्रैल से जून के बीच दूसरी तिमाही में टीबी के 615 नए मरीज सामने आए।
दूसरी तिमाही के दौरान कोरोना के चक्कर में टीबी के प्रति जागरूकता अभियान भी प्रभावित हुआ और नए मरीजों की पहचान में भी शिथिलता आई, बावजूद इसके 615 नए मरीज आ गए।
वहीं, पिछले साल जिले में 98 मरीजों की टीबी से मौत हुई थी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है।
टीबी के मरीजों की हो रही जांच
संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए अब टीबी मरीजों की अनिवार्य रूप से कोविड-19 जांच भी की जा रही है। विभाग जिले में पूरी तत्परता से टीबी मरीजों को कोरोना के प्रति जागरूक कर रहा है और इलाज व चिकित्सकीय परामर्श के लिए आने वाले प्रत्येक मरीज की कोविड-19 की जांच कर रहा है।
विभाग टीबी के रोगियों से हर हाल में कोविड-19 की जांच कराने की अपील भी कर रहा है। क्षय रोग विभाग के प्रमुख डॉ. विजय कुमार ने बताया कि कोरोना के शुरुआती दिनों में लॉकडाउन के कारण ओपीडी में मरीजों की संख्या कम हुई थी, लेकिन अब ओपीडी में प्रतिदिन करीब 80-90 मरीज आ रहे हैं।
लॉकडाउन के दौरान ओपीडी में मरीजों की संख्या घटकर 40-50 तक रह गई थी। टीबी के मरीजों की पहचान व जागरूकता के लिए आशा कार्यकर्ताओं को लगाया गया है, जो शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण अंचलों में भी जाकर मरीजों को जागरूक कर रही हैं।