माता पिता की देखभाल उनके सभी बच्चों की जिम्मेदारी है और वह इसका बंटवारा नहीं कर सकते। यह कड़ी टिप्पणी हाईकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए की है। इस याचिका में एक बेटे ने माता पिता को दो हजार रुपए महीना देने के आदेश को चुनौती दी थी।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने यह प्रतिक्रिया एक बेटे की याचिका खारिज करते हुए दी है। बेटे ने सीनियर सिटीजन मेंटीनेंस ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे माता पिता को हर माह दो हजार रुपए खर्च देने के लिए कहा गया था।
खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि माता पिता की देखाभाल उनके सभी बच्चों की समान जिम्मेदारी है और इसका किसी तरह भी बंटवारा नहीं किया जा सकता। याची का दावा था कि ट्रिब्यूनल व अपीलैट टिब्यूनल ने उसकी खराब वित्तीय हालत पर विचार किए बिना उस पर गुजाराभत्ते का खर्च का बोझ डाला है। इसलिए इस आदेश को रद किया जाए।
याची ने इसके अलावा एकल पीठ के फैसले को भी चुनौती दी थी क्योंकि पीठ ने भी गुजाराभत्ता देने के फैसले को सही ठहराया था। खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए इस बात पर गौर किया कि दो हजार रुपए की राशि बेहद मामूली है और इस आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।