एम्स के विशेषज्ञों ने कहा-समय पर इलाज और सही प्राथमिक उपचार से बचाया जा सकता है चोटिल दांत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दांतों में चोट लगना आम बात लग सकती है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रह सकता है। 2018 में डेंटल ट्रॉमेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा लोग गंभीर दंत चोट (ट्रॉमेटिक डेंटल इंजरी) से प्रभावित हो चुके हैं। विशेषज्ञ इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी समस्या मानते हैं।
एम्स दिल्ली के सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च (सीडीईआर) के प्रोफेसर डॉ. अजय लोगानी ने बताया कि गिरने, सड़क दुर्घटना, खेल, घरेलू हिंसा और रोजमर्रा की घटनाओं से दांतों में चोट लग सकती है। चोट के बाद लंबे समय तक इलाज और नियमित जांच की जरूरत पड़ सकती है।
सीडीईआर के प्रोफेसर डॉ. नितेश तिवारी ने कहा कि बच्चों में दांत की चोट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसका असर चेहरे के विकास, दिखावट और मानसिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। वहीं, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि चोट के बाद शुरुआती समय में सही कदम उठाना जरूरी है। स्कूलों, खेल मैदानों और आपातकालीन सेवाओं में दंत चोट से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।