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Delhi NCR News: रंगलेयर रबी में जीवंत हुई टैगोर की रंगमंचीय विरासत

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प्रस्तुति ने दिखाया क्यों आज भी प्रासंगिक हैं उनके नाटक
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रवींद्रनाथ टैगोर के नाटकों और बंगाली जन-रंगमंच के जटिल संबंधों को केंद्र में रखकर तैयार की गई प्रस्तुति 'रंगलेयर रबी (जन-मंच के रबी)' ने इंडिया हैबिटेट सेंटर के अमलतास ऑडिटोरियम में दर्शकों को टैगोर की रंगमंचीय विरासत से नए दृष्टिकोण से परिचित कराया। वांडर्स फुटप्रिंट्स ट्रैवल बुटीक और स्थापना शांतिनिकेतन की संयुक्त प्रस्तुति की संकल्पना प्रकृति मुखोपाध्याय ने तैयार की।
संगीत, कथावाचन और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से प्रस्तुति ने बताया कि उस दौर का बंगाली पब्लिक थिएटर व्यावसायिकता और पुरुष-प्रधान सोच से प्रभावित था, जिसके कारण टैगोर की मौलिक नाट्य-दृष्टि को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जा सका। बावजूद इसके, टैगोर अपने नाटकों के मंचन में रुचि लेते थे और अभिनेत्रियों की प्रतिभा की सराहना करते थे। प्रस्तुति में टैगोर के 25 से अधिक मंच-रूपांतरणों से चुने गए गीतों व रोचक कहानियों को पिरोया गया।
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कार्यक्रम में यह रेखांकित किया गया कि टैगोर के नाटक केवल साहित्यिक धरोहर नहीं, बल्कि आज के सामाजिक-राजनीतिक परिवेश में भी संवाद करते हैं। कथावाचन प्रसिद्ध अभिनेता सुजॉय प्रसाद चटर्जी ने किया, जिन्होंने इसे 'समय की यात्रा' बताया। संगीत में प्रत्युष व प्रकृति मुखोपाध्याय और वाद्य पर सुरजीत दास व नीलांजन सेनगुप्ता ने सहयोग किया।
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