दिल्ली निजामुद्दीन मरकज मामले में 60 मलेशियाई नागरिकों के वकील ने गुरुवार को जानकारी दी कि अदालत ने 7 हजार रुपये का जुर्माने लगाकर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है। मलेशियाई नागरिकों पर वीजा नियमों का उल्लंघन करने और कोरोना वायरस के समय दिल्ली की निजामुद्दीन मरकज में एकत्र होकर सरकार के दिशा-निर्देश के उल्लंघन का आरोप था। वकील ने बताया कि मलेशियाई नगारिकों ने आरोपों को स्वीकार करते हुए कम सजा की मांग के लिए याचिका लगाई थी।
मलेशियाई नागरिकों के वकील ने जानकारी दी कि मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ मलिक ने कहा कि मलेशियाई नगारिकों ने आरोपों को स्वीकार कर लिया है और उन्हें बारगेन प्रोसेस के अंतर्गत कम सजा मिलेगी।
वकील एस हरि हरन ने बताया कि मलेशियाई नगारिकों की दलीलों पर लाजपत नगर के एसडीएम, एसीपी लाजपत नगर और निजामुद्दीन के इंस्पेक्टर को कोई आपत्ति नहीं थी। जिसके बाद विदेशी नागरिकों को जमानत दे दी गई। याचिका में आरोपियों ने कम सजा की मांग की थी। इससे पहले आरोपियों को 7 जुलाई को 10 हजार रुपये के जुर्माने पर जमानत दी गई थी।
आठ देशों के 76 लोगों मिली जमानत
दिल्ली की एक अदालत ने वीजा शर्तों का कथित तौर पर उल्लंघन कर राष्ट्रीय राजधानी के निजामुद्दीन इलाके में स्थित तबलीगी जमात के मरकज के एक आयोजन में शामिल होने के मामले में 8 देशों के 76 लोगों को गुरुवार को जमानत दे दी है। मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर ने दस हजार रुपये के निजी मुचलके पर विदेशियों को जमानत दी।
कुछ विदेशी नागरिकों की ओर से पेश वकील आशिमा मंडला ने कहा कि आरोपी शुक्रवार को अपनी अर्जी दायर करेंगे। सुनवाई के दौरान, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी विदेशी नागरिकों को अदालत में पेश किया गया।
आरोपियों के लिए पेश हुए वकील दाकिनी सिंह, फहीम खान और अहमद खान ने बताया कि विदेशी नागरिक माली, नाइजीरिया, श्रीलंका, केन्या, जिबूती, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका और म्यांमार से हैं।