स्वाइन फ्लू से पीड़ित शील गोयल की बुधवार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में मौत हो गई। ईस्ट मॉडल टाउन निवासी शील गोयल (50) के स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने का गाजियाबाद में पहला मामला है।
मौत से करीब 12 दिन पूर्व वह दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती अपने रिश्तेदार से मिलने गई थीं, उसी दिन से उनकी तबियत बिगड़ गई थी। परिजनों ने निजी अस्पताल में पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है।
शील के पति नरेश गोयल पराग डेयरी में कार्यरत हैं जबकि दो बेटे अर्पण केमिकल बिजनेस और सरल निजी कंपनी में काम करते हैं। सरल ने बताया कि 12 दिसंबर को उनके एक रिश्तेदार का दिल्ली-शाहदरा के खंडेलवाल अस्पताल में पथरी का ऑपरेशन था।
मम्मी उन्हें देखने अस्पताल गईं थीं। वहीं पर तबियत बिगड़ गई। शाम को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, मगर उनकी हालत बिगड़ती चली गई। 17 दिसंबर को ज्यादा हालत बिगड़ने पर उन्होंने मम्मी को कोलंबिया एशिया अस्पताल में भर्ती करा दिया।
20 दिसंबर को डाक्टरों ने उन्हें एन1एच1 पॉजीटिव घोषित कर दिया। 20 की रात को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका कहना था कि कोलंबिया एशिया अस्पताल के डाक्टरों के कहने के बाद वह टैमीफ्लू लेने के लिए एमएमजी अस्पताल गए थे।
वहां टैमीफ्लू तो नहीं मिली, मगर उसी साल्ट के पांच पत्ते दिए गए। हालांकि इसके बाद से अस्पताल प्रशासन ने उनकी कोई खबर नहीं ली है। खास बात यह है कि शील गोयल कभी विदेश ही नहीं गई।
गंगा राम अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि शील को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उनका इलाज चेस्ट मेडिसिन के डॉक्टर नीरज जैन की निगरानी में हुआ, लेकिन बुधवार को ही उनकी मौत हो गई।
प्रशासन का कहना है कि शील गोयल को जब अस्पताल लाया गया तो स्थिति इतनी नाजुक थी कि जीवन रक्षक उपकरण के सहारे रखा गया था। फेफड़ा पहले ही काम करना बंद कर चुका था।
स्वाइन फ्लू डिटेक्ट, सो रहा स्वास्थ्य विभाग
जिले में स्वाइन लू ने दस्तक दे दी है, लेकिन अस्पतालों में स्वाइन फ्लू से बचाव और इलाज के लिए कोई तैयारी नहीं है। स्वाइन फ्लू पीड़ित मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दिए जाते हैं, जो अभी तक नहीं भेजे गए हैं। अस्पतालों में इलाज के दौरान पहने जाने वाले मास्क और ग्लब्स की भी कमी है।
सैंपल जांच नहीं की
लखनऊ एसजीपीजीआई में ही सैंपल जांच की सुविधा है। इसके अलावा प्रदेश के किसी भी जिले में स्वाइन लू सेल का गठन नहीं है। अस्पतालों में स्वाइन लू के मरीज का इलाज करते वक्त पहने जाने वाले जरूरी मास्क और दस्तानों का भी अभाव है।
दवा टेमीफ्लू संक्रामक रोग विभाग से ही मिलती है इसकी वजह से भी मरीजों को परेशानी होती है। शहर में एमएमजी स्थित संक्रामक रोग विभाग में संदिग्ध स्वाइन फ्लू मरीजों के सैंपल कलेक्ट किये जाते हैं लेकिन जांच के लिए सैंपल दिल्ली ही भेजा जाता है। इसकी वजह से रिपोर्ट मिलने में देर होती है।