पिछले 48 घंटे के दौरान दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के सवा सौ नए मरीज इलाज के लिए भर्ती हुए हैं। बुधवार तक दिल्ली निवासी 580 लोग फ्लू ग्रस्त हो चुके हैं। जबकि बाहरी राज्यों के मरीजों को मिलाकर ये आंकड़ा 800 पार कर चुका है। इतना ही नहीं, स्वाइन फ्लू की वजह से हो रही मरीजों की मौत की संख्या भी बढ़कर 17 हो चुकी है। अकेले आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल में ही अब तक 12 मरीज दम तोड़ चुके हैं। स्वाइन फ्लू के बढ़ने मामलों के चलते दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पतालों में बिस्तर भी कम पड़ने लगे हैं।
एम्स के मेडिसन विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर नवल विक्रम का कहना है कि जिन लोगों को इंफ्लूएंजा से अधिक खतरा है वे इससे बचाव के लिए वैक्सीन इस्तेमाल कर सकते हैं। 65 साल या उससे ऊपर के सभी लोग, मधुमेह, अस्थमा से पीड़ित लोगों को, गर्भवती स्त्री, बच्चे इत्यादि को सुरक्षा की दृष्टि से वैक्सीन देना चाहिए। इससे स्वाइन फ्लू के संक्रमण को कुछ हद तक रोका जा सके।
2009 में मैक्सिको में मिले थे स्वाइन फ्लू के मामले
साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा का कहना है कि यह सांस से जुड़ी बीमारी है, जो इंफ्लुएंजा टाइप ए से होता है। इससे सूअर भी संक्रमित होते हैं। एच1एन1 वाइयस से दुनियाभर में 2009 में 18000 मौतें हुई थी। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू के शुरुआती मामले 2009 में मैक्सिको में पाए गए थे। अब तक लगभग सौ देशों में इस संक्रमण ने लोगों को चपेट में लिया है। इसके लक्षण आम फ्लू से मिलते जुलते ही हैं। इसकी पहचान खून की जांच से ही संभव है।
एंबुलेंस में नहीं है किट, स्वास्थ्य कर्मचारी परेशान
बढ़ते स्वाइन फ्लू की वजह से दिल्ली कैट्स एंबुलेंस कर्मचारी भी परेशान हैं। इनका कहना है कि किसी भी एंबुलेंस में स्वाइन फ्लू की किट नहीं है। इसके कारण उन्हें खुद के संक्रमित होने का खतरा है। वे कई बार यूनियन के जरिए इस समस्या को सरकार तक रख चुके हैं, लेकिन अब तक सभी एंबुलेंस में स्वाइन फ्लू किट उपलब्ध नहीं कराई है। कर्मचारियों को सरकार की इस लापरवाही के कारण संक्रमित होने का काफी भय है।