करीब एक दशक से दुनिया भर के कई मुल्कों को सूर्य मित्र बनने का प्रशिक्षण दे रहे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (एनआईएसई) का फलक अब और बढ़ जाएगा।
ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रही दुनिया को अब हिंदुस्तान सोलर एनर्जी की नई रोशनी देगा। फ्रांस में हुए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का अंतरराष्ट्रीय सचिवालय दिल्ली से सटे साइबर सिटी में स्थित अरावली की वादियों में बनने जा रहा है।
कर्क और मकर रेखा के बीच आने वाले 121 देशों में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। इस लिए अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन देशों को सूर्यपुत्र की उपाधि देते हुए इन्हें एक छत के नीचे आकर इस क्षेत्र काम करने का आमंत्रण दिया था।
इसी के लिए बन रहे सचिवालय की शुरुआत करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद 25 जनवरी को साइबर सिटी में आ रहे हैं।
फरीदाबाद-गुड़गांव रोड स्थित एनआईएसई में रिसर्च साइंटिस्ट राहुल पचौरी का कहना है कि संस्थान करीब एक दशक से दुनिया के अलग-अलग देशों को सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने की ट्रेनिंग दे रहा है।
इस समय भी मॉरीशस, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, मालदीव और सूडान सहित 10 देशों के 14 प्रतिनिधि सौर ऊर्जा का प्रेक्टिकल और किताबी ज्ञान ले रहे हैं। उन्हें सौर ऊर्जा के प्लांट के डिजाइन जैसी कई महत्पूर्ण जानकारियां तीन सप्ताह में दी जाएंगी।
संस्थान के उप महानिदेशक डॉ. एनबी राजू का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बाद अपना देश सौर ऊर्जा क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाले 121 देशों को लीड करेगा। यह पूरे देश के लिए गौरव की बात होगी।