गुड़गांव में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग का बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के तहत एक करोड़ रुपये दिए हैं।
जिसका खर्च अस्पताल के बुनियादी ढांचा के साथ मरीजों को सुविधा देने के लिए किया जाएगा। इस बाबत सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास मंडल की ओर से सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है। जबकि जर्जर बिल्डिंग में सुविधाओं का विस्तार के लिए कोई जगह ही नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग को इस योजना के तहत मिली राशि को मरीजों को सुविधाओं के लिए तीन मद में खर्च करने के लिए कहा गया है। इसमें फिजियोथैरेपी यूनिट, डॉरमेट्री हॉल और मरीजों की सुविधा का विस्तार के लिए की बात कही गई है।
हालांकि मरीजों की सुविधा को परिभाषित नहीं किया गया। इस वजह से इसे कहीं भी खर्च किया जा सकता है। राशि आवंटन होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सिविल अस्पताल की काया बदलने की तैयारी में जुट गया है। अस्पताल की इंटरनल कमेटी से अस्पताल से जुड़े मुद्दे और समस्याओं के बारे में सूची मांगी गई है। जिनके बाद अलग-अलग मदों में कहां-कहां कितना खर्च किया जाएगा? इस बारे में तय होगा।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक फिजियोथैरपी यूनिट में नई मशीनें लगाई जाएगी। मरीजों के पीने को वाटर कूलर, ओपीडी में एसी, ऑपरेशन थियेटर का विस्तार समेत अन्य सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ ने बताया कि रेल मंत्री ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत सिविल अस्पताल का चयन किया है। इस योजना के तहत बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार दिया जाएगा। इसके लिए प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. कांता गोयल को पत्र भेज दिया गया है।
सवाल: 1
कहां होगा विस्तार
41 साल पुरानी अस्पताल की इमारत अब जर्जर हो गई है। पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर बने गायनी वार्ड को कंडम घोषित कर दिया गया है। जबकि अस्पताल को भी असुरक्षित बताया है। प्रथम तल पर शिफ्ट हुए गायनी वार्ड में 25 जून 2016 को प्लास्टर गिर चुका है। बता दें कि बीते डेढ़ साल में छह बार अस्पताल के अलग-अलग जगहों से भारी प्लास्टर गिर चुका है। बिल्डिंग में अब जगह नहीं है तो विस्तार कहां होगा? इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
सवाल: 2
डॉक्टरों की कमी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुविधाओं के विस्तार की बात कही जा रही है, लेकिन डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए कोई ध्यान नहीं है। चर्म रोग, ईएनटी, सर्जन जैसे महत्वपूर्ण विभाग एक डॉक्टर के सहारे चल रहा है। डॉक्टर की छुट्टी पर चले जाने पर ओपीडी सेवा तक बंद हो जाती है।
सवाल:3
डॉरमेट्री बनाने के लिए नहीं है जगह
अस्पताल में डॉरमेट्री बनाने के लिए इस योजना के तहत कहा गया है। तीन मंजिला अस्पताल में अब जगह ही नहीं है कि अस्पताल का विस्तार किया जाए या एक मंजिला इमारत तैयार की जाए। ऐसे में डॉरमेट्री कहां बनेगा, इस पर बड़ा सवाल है।
अभी पत्र आया है। इसे लेकर अब मंथन किया जा रहा है। अस्पताल की बिल्डिंग की मरम्मत भी कराई जा सकती है। कहां-कहां खर्च करना है? इस बारे में जल्द तय किया जाएगा।-डॉ. कांता गोयल, प्रधान चिकित्सा अधिकारी