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फांसी से पहले सुरेंद्र कोली को हुई एक नई बीमारी

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निठारी के नर पिशाच सुरेंद्र कोली की इन दिनों भूख में कमी डिप्रेशन का लक्षण है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक ज्यादातर अपराधी फांसी से पहले डिप्रेशन में चले जाते हैं। कुछ ही ऐसे होते हैं, जिन पर सजा का डर हावी नहीं होता।
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मनोचिकित्सक डॉ. अजय डोगरा बताते हैं कि फंदे पर लटकने का दिन करीब आने के साथ ही अपराधी में डिप्रेशन बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में उसकी भूख कम हो जाती है। जिंदगी को लेकर सारी उम्मीदें खत्म होने से वो किसी भी चीज में रुचि नहीं लेता।

फांसी के ठीक पहले वाली रात घबराहट में बीतती है। इन सबके बीच अपराधी को अपने किए पर पछतावा भी होता है। हालांकि कुछ ऐसे भी अपराधी होते हैं जिनमें मौत का खौफ नहीं दिखता है। यह उनकी प्रवृत्ति का हिस्सा है।
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पीड़ित परिजनों को कोली की फांसी का इंतजार
निठारी कांड के पीड़ित परिजनों को कोली को जल्द फांसी दिए जाने का इंतजार है। कोली को फांसी पर जहां निठारी वासी संतोष जता रहे हैं, वहीं उनको मोनिंदर सिंह पंधेर को भी फांसी की सजा का दिन मुकर्रर होने की उम्मीद है। लोगों को इंतजार है कि सुबह जब उनकी आंख खुले तो सूचना मिल जाए कि कोली को लटका दिया गया है।

'नर पिशाच को फांसी की सजा बेहद कम'

गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत से कोली को फांसी का ऐलान हुए करीब दो साल से अधिक समय बीत चुका है। इसके बाद कभी हाईकोर्ट तो कभी सुप्रीम कोर्ट में मामला खिंचा। फिर भारत सरकार और राष्ट्रपति के पास केस जाने से दो साल इंतजार और बढ़ गया।

अब कोली को फांसी का दिन मुकर्रर होने पर निठारी पीड़ितों को इंसाफ की आस जगी है। दस साल की बच्ची ज्योति के पिता जग्गूलाल ने कहा कि जिस दिन कोली को फांसी मिलेगी, उस दिन लगेगा कि गरीबों को भी इंसाफ मिला है।

वह चाहते हैं कि उनकी बेटी की मौत के जिम्मेदार मोनिंदर सिंह पधेर को भी फांसी मिले। पास की डी-2 कोठी में चौकीदारी का काम करने वाले पप्पूलाल ने कहा कि कोली को फांसी मिलने पर ही उनकी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।

उनकी आठ वर्षीय बेटी रचना भी इस कांड का शिकार बनी थी। इसके अलावा अनिल हलदर समेत कई अन्य पीड़ित परिजनों ने भी कहा कि उन्हें कोली को फांसी मिलने का इंतजार है।

नर पिशाच को फांसी की सजा बेहद कम
कोली को फांसी की सजा तो मिल रही है। इसका हमें थोड़ा संतोष जरूर है, लेकिन जिस तरह का घिनौना कांड उसने किया था। उस नर पिशाच की सजा बेहद कम है। उसने जिस बेरहमी से छोटे-छोेटे मासूम बच्चों को मारा है। इसकी सजा तो यहां से अधिक उसे भगवान के पास ही भुगतनी पड़ेगी। कोली को फांसी मिलने पर न्याय की आस तो जिंदा हुई है लेकिन पंधेर को भी फांसी मिले तो गरीबों को सच्चा न्याय मिलेगा।
- ऊषा ठाकुर, समाजसेवी
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बदनुमा दाग धोने में जुटा निठारी

आठ साल पहले निठारी कांड ने इस गांव को न सिर्फ देश में, बल्कि दुनिया भर में चर्चा में ला दिया था। उस दाग को धोने के लिए यह गांव विकास की राह पर चल रहा है। प्राधिकरण और ग्राम पंचायत मिलकर इसको विकसित करने में जुटे हैं।

गांव की प्रधान विमलेश शर्मा बताती हैं कि निठारी कांड से पहले गांव के नालों की सफाई होती ही नहीं थी, मगर कंकाल मिलने के बाद अब साल में कम से कम दो बार सफाई कराई जाती है। बेशक, किसी और गांव में सफाई न हो।

निठारी का बारातघर जर्जर अवस्था में पहुंच चुका था, मगर इसका नए सिरे से निर्माण कराया गया। सिर्फ गेट लगना बाकी है। गांव की कुछ सड़कों को छोड़कर बाकी को दुरुस्त किया जा चुका है। सीवर व नालियों की लाइन बदली जा रही हैं। अब तक 60 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है।

गांव में स्थित स्कूल में पांच नए ट्वॉयलेट बनाए गए हैं। गांववालों की दो और मांगों को पूरा करने पर प्राधिकरण विचार कर रहा है।

पहला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाना और दूसरा बच्चों के खेलने के लिए पार्क। विमलेश शर्मा गांव केसभी नालों को ढकने की मांग कर रही हैं। प्राधिकरण इस पर भी विचार कर रहा है। दो साल में इन सभी कार्यों के पूरा होने की उम्मीद है।
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