बृहस्पतिवार को सूरजकुंड मेले की चौपाल देसी कलाकारों के नाम रही। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपने पारम्परिक वेशभूषा से ठुमके लगाकर दर्शकों का मनोरंजन किया। शाम के वक्त विदेशी कलाकारों से चौपाल सजी।
मेले के समापन की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है मेले में दर्शकों की भीड़ उसी रफ्तार से बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में दशर्कों ने मेले का आनंद लिया।
मेले के चारों ओर बनाई गई पार्किंग लगभग फुल हो चुकी थी। भीड़ में सर्वाधिक संख्या स्कूल कॉलेज छात्रों की रही। क्योंकि सरकार ने उनके लिए मेला फ्री कर रखा है।
राजस्थान, पंजाब, झारखंड, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति पेश की। झारखंड के कलाकारों ने जहां छोऊ नृत्य में महिषासुर मर्दन की प्रस्तुति कर दर्शकों की तालियां जमकर बटोरी वहीं राजस्थान के कलाकारों ने चकरी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मंनोरंजन किया।
रूपसिंह एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत चकरी नृत्य में सभी कलाकार खेतीबाड़ी के कारोबार से जुड़े हैं। वहां की लोक परंपरा को बनाए रखने के लिए शादी -विवाह, होली, दीपावली समेत अन्य अवसरों पर वह चकरी नृत्य की प्रस्तुति करते हैं।
इसे उत्सव नृत्य के रूप में भी जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने लांवड़ा हास्य नाटिका प्रस्तुत कर लोगों का मनोरंजन किया। शाम के वक्त चौपाल विदेशी कलाकारों के नाम रही।
मेला टिकट में हुआ संशोधन:
मेला प्रशासन ने टिकट के दरों में संशोधन भी किया है। अब सामान्य लोगों के लिए टिकट की दर 80 रुपये प्रति व्यक्ति और वीकेंड पर 120 रुपये निर्धारित किया गया है।
जबकि मेला प्रशासन ने अपने 100 और 120 रुपये टिकट होने की बात कही थी। कॉलेज गोईंग छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आम दिनों में 40-40 रुपये जबकि वीकेंड पर 60-60 रुपये निर्धारित की गई है। मेला प्रशासन ने अब इस बाबत सभी प्रवेश द्वार पर रेट लिस्ट भी लगा दी है।