एक अदद फ्लैट की बाट जो रहे हजारों फ्लैट खरीदारों की मनोदशा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जेपी एसोसिएट लिमिटेड के पांच प्रमोटरों, आठ स्वतंत्र निदेशकों और उनके नजदीकी परिजनों को अपनी संपत्तियां बेचने पर रोक लगा दी है।
शीर्ष अदालत ने कंपनी के प्रमोटरों से कहा कि आप फ्लैट खरीदारों की वजह से बुलंदियों पर पहुंचे हैं। आपकी यह यात्रा बेहद सुखद रही है, लेकिन फ्लैट खरीदारों के हितों के लिए अब आपको नीचे आना पड़ेगा।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को फ्लैट खरीदारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि संपत्ति बेचने पर रोक के इस आदेश की अवेहलना करना न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी और ऐसा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने जेपी एसोसिएट के प्रमोटरों से कहा कि एक अच्छे बच्चे की तरह वह फ्लैट खरीदारों को रकम वापस कर दें। वे मध्य वर्ग के लोग हैं और उन्होंने बैंकों से लोन रखा है।
ऐसे में उनके हितों के बारे में सोचना जरूरी है। प्रमोटरों और स्वतंत्र निदेशकों को अपनी संपत्तियों को बेचने पर रोक लगाने की वजह यह सुनिश्चित करना है कि जरूरत पड़ने पर फ्लैट खरीदारों को रकम वापस की जा सके।
कोर्ट में हाजिर हुए सभी 13 निदेशक
अदालती निर्देश के तहत बुधवार को जेपी एसोसिएट के पांच प्रमोटर और आठ स्वतंत्र निदेशक अदालत में उपस्थित हुए। पीठ ने प्रमोटरों और निदेशकों को कहा कि इसमें कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। पीठ ने कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों को हलफनामे के जरिए अपनी संपत्तियों का ब्योरा रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया है। याद रहे कि अदालत कंपनी के प्रबंध निदेशक और निदेशकों के विदेश जाने पर भी रोक लगा चुकी है।