आप बेशक दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन चला रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब पार्टी के सियासी संग्राम की धार कुंद होगी। अभी पार्टी दिल्लीवालों से पूर्ण राज्य के नाम पर भावात्मक अपील कर रही है लेकिन नए परिदृश्य में ऐसा करना संभव नहीं होगा। अदालत ने टिप्पणी की है कि मौजूदा संवैधानिक ढांचे में दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं हो सकता।
हालांकि, पार्टी अपने पूर्ण राज्य के आंदोलन को अभी भी सियासी तौर पर जायज बता रही है। दरअसल, पूर्ण राज्य आंदोलन की रणनीति दिल्ली सरकार को काम न करने देने की मजबूरी के इर्दगिर्द तैयार की गई थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से आम दिल्लीवालों के नाम लिखे पत्र में भी दिल्ली को गुलाम बताया गया।
वहीं, आजादी की दूसरी जंग में शामिल होने की अपील भी दिल्लीवालों से की गई। दूसरी तरफ, उपराज्यपाल को वायसराय की उपाधि देते हुए पार्टी हमलावर थी। इस दौरान लोगों से कहा जा रहा है कि उपराज्यपाल दिल्ली सरकार को काम नहीं करने दे रहे हैं। अगर सरकार अपने मनमाफिक काम करती तो शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन डिलवरी, सीसीटीवी आदि मसलों पर आम लोगों की जरूरतें पूरी हो जातीं।
अब अदालत ने अपने फैसले में तकरीबन सारे मसले स्पष्ट कर दिए हैं। जमीन, पुलिस व कानून व्यवस्था के अलावा दूसरे सारे मसले दिल्ली सरकार के अधीन होंगे। ऐसे में आम आदमी पार्टी जिन मसलों के सहारे पूर्ण राज्य का आंदोलन चला रही थी, उस पर तार्किक तौर पर अब ज्यादा बोलने की गुंजाइश नहीं है। फिर, अदालत ने भी साफ कर दिया है कि मौजूदा सिस्टम में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की उम्मीद दूर-दूर तक नहीं है।
उधर, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह कैसे संभव होगा कि दिल्ली के किसी इलाके में होने वाले अपराध पर केंद्र के अधीन काम करने वाली पुलिस फैसला करे। इसे दिल्ली सरकार बेहतर तरीके से देख सकती है। पार्टी का कहना है कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।