सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकारी विकलांगों को सुविधा देने को तैयार नहीं। गुड़गांव में अधिकतर सरकारी कार्यालयों में अब तक रैंप नहीं बनाए गए। जिस कारण विकलांगों को सरकारी कार्यालय में अंदर पहुंचने के लिए मशक्कत करने को मजबूर होना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट का साफ तौर पर आदेश है कि हर एक सरकारी दफ्तर में रैंप बनाया जाए। विकलांग आसानी से कार्यालय के अंदर आ सकें इसके लिए पुख्ता प्रबंध किया जाए। इसके बाद भी सार्वजनिक सेवाएं देने वाले कार्यालय रैंप नहीं बनवा रहे।
नगर निगम में रोजाना हजारों की संख्या में लोग आते हैं। जिसमें जन्म -मृत्यु प्रमाण पत्र , प्रॉपर्टी टैक्स, एनओसी,भवन मैप, आरटीआई सहित अन्य सेवाओं के लिए आना पड़ता है।
यहां विकलांगों को कार्यालय के अंदर पहुंचने के लिए काफी मुसीबत सहनी पड़ती है। पेयजल, सड़क, सीवर, स्ट्रीट लाइट, पार्क सहित शहर की अन्य समस्याओं की शिकायत करने के लिए निगम आयुक्त के कार्यालय आने वाले विकलांग आयुक्त तक नहीं पहुंच सकते। आयुक्त कार्यालय तक जाने के लिए किसी तरह का रैंप नहीं है।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के सेक्टरों में रहने वाले विकलांग यदि हुडा मुख्यालय आकर शिकायत दर्ज कराना चाहें तो उन्हें भी दिक्कते सहनी होती हैं। यहां रैंप नहीं बनाया गया है। जिस कारण लोगों को परेशानी होती है।
जिला प्रशासन की ओर से हाल ही में बनाए गए अदालत के नए भवन में रैंप नहीं बनाया गया। यह भवन काफी ऊंचाई पर बनाया गया है। श्रम अदालत तक पहुंचने के लिए विकलांगों के समक्ष 10 सीढ़ियों की चुनौती का सामना करना होगा।
बिजली की शिकायत लेकर जाने वालों के लिए भी रैंप नहीं है। सिविल लाइन में बनाए गए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी रैंप नहीं है। लघु सचिवालय परिसर तथा विकास सदन में सीढ़ियों के साथ साथ रैंप बनाया गया है।