सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यूनिटेक लिमिटेड को और पांच करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया। उधर, शीर्ष अदालत यूनिटेक लिमिटेड के प्रमोटर संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रो के अंतरिम जमानत याचिका पर आठ सितंबर को विचार करेगी।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पाया कि यूनिटेक ने पूर्व आदेशानुसार 15 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कर दिया है। पीठ ने इस रकम को 158 निवेशकों में वितरित करने का आदेश दिया है। वहीं पीठ ने संजय चंद्रा व उनके भाई अजय चंद्रा की अंतरिम जमानत की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन यह संकेत दिया है कि अगर यूनिटेक अपने वादे के अनुसार काम करती है तो उन्हें आठ सितंबर को अंतरिम जमानत दी जा सकती है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम जमानत चार हफ्ते की हो सकती है।
125 निवेशकों की पैरवी कर रहे वकील एमएल लाहौटी ने पीठ से कहा कि इन लोगों ने यूनिटेक के तीन प्रोजेक्ट विस्ता, बरगंडी और अंबर में फ्लैट बुक करा रखा है और ये सभी फ्लैट लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि फ्लैट बन कर तैयार हैं लिहाजा उन्हें कब्जा मिलना चाहिए। इस पर पीठ ने लाहौटी से कहा कि वह सभी निवेशकों की सूची बिल्डर के अधिकृत एजेंट को दें। अधिकृत एजेंट उन सभी के कागज का सत्यापन करेंगे। अगली सुनवाई में इस मसले पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मालूम हो कि गुरुग्राम के एक प्रोजेक्ट के निवेशकों द्वारा धोखाधड़ी की शिकायत पर दायर मुकदमे के बाद संजय चंद्रा और उसके भाई को जेल भेज दिया गया था। इससे पहले अप्रैल में दोनों भाइयों को तीन महीने की अंतरिम जमानत दी गई थी, लेकिन 11 अगस्त को अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने से ट्रायल कोर्ट ने इनकार कर दिया था।
हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिलने पर अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पिछली सुनवाई में संजय चंद्रा ने कहा था कि वह तीन महीने में फ्लैट निवेशकों की रकम वापस कर देंगे। चंद्रा ने कहा था कि कि उन्हें रकम का जुगाड़ करने के लिए जेल से बाहर आना होगा।