पीठ ने कहा कि जरूरी खर्च का 70 प्रतिशत हिस्सा रेलवे और तीन प्रतिशत राज्य सरकार उठाएगी और मानव श्रम दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, रेलवे और सरकारी एजेंसियों द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा और वे एक-दूसरे से इसका शुल्क नहीं वसूलेंगे।
शीर्ष अदालत ने एसडीएमसी, रेलवे और अन्य एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उनके ठेकेदार रेल पटरियों के किनारे कूड़ा न डालें और रेलवे को एक दीर्घकालिक योजना भी बनानी होगा कि पटरियों के किनारे कूड़े के ढेर न लगाए जाएं।
पीठ ने कहा, 'ईपीसीए की रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर के साथ ही रेलवे द्वारा दायर जवाब दिखाता है कि अब तक कुछ नहीं किया गया है और कूड़े का ढेर लग गया है और उसी वक्त, उस इलाके में मानव आबादी अनधिकृत ढंग से बस गई जिसपर ध्यान देने की जरूरत है। इस संबंध में की गई कार्रवाई से इस अदालत को एक माह के भीतर अवगत कराया जाए।'
पीठ ने उत्तर रेलवे के डीआरएम कार्यालय में अतिरिक्त संभागीय रेलवे प्रबंधक, एके यादव द्वारा दायर हलफनामे का संज्ञान लिया और कहा कि यह बताया गया है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के इलाके में 140 किलोमीटर तक रेल पटरियों के किनारे झुग्गियां बहुत अधिक संख्या में मौजूद हैं।