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Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या कैदियों की समय पूर्व रिहाई की फाइलों पर केजरीवाल नहीं कर सकते हस्ताक्षर

Sat, 07 Sep 2024 05:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण रिहाई के मामलों में देरी हो रही।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या कोई नियम है जो जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कैदियों की समय पूर्व रिहाई (छूट) की फाइलों पर हस्ताक्षर करने से रोकता है? केजरीवाल दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में  जेल में हैं।

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जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण रिहाई के मामलों में देरी हो रही। समय पूर्व रिहाई के लिए एक कैदी के आवेदन दिल्ली में उपराज्यपाल के पास पहुंचने से पहले फाइल पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होना चाहिए। पीठ ने दिल्ली सरकार से पूछा, कृपया बताएं कि क्या समय पूर्व रिहाई वाली फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ कोई पाबंदी आदेश है?

इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही वकील अर्चना डेव ने कहा कि वे इस संबंध में निर्देश लेंगे। पीठ ने कहा, आप बताइए कि क्या इस संबंध में कोई नियम है, अन्यथा हमें भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करना होगा क्योंकि इन मामलों को इस तरह से रोका नहीं जा सकता है।
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केजरीवाल 21 मार्च को ईडी की गिरफ्तारी के बाद से जेल में हैं। हालांकि इस बीच दो सप्ताह आम चुनाव में पार्टी के प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिली थी। केजरीवाल के खिलाफ ईडी के साथ सीबीआई का भी मामला चल रहा है। ईडी मामले में केजरीवाल को जमानत मिल चुकी है, सीबीआई मामले में वह जेल में हैं। 5 सितंबर को सीबीआई मामले में उनकी जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

भूषण स्टील के पूर्व प्रवर्तक को सुप्रीम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने भूषण स्टील के पूर्व प्रवर्तक नीरज सिंघल को 46,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि सिंघल 16 महीने से जेल में हैं और मुकदमा जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। आर्थिक अपराधों में कहीं न कहीं एक सीमा रेखा खींचनी ही पड़ती है। आप अर्थव्यवस्था को हिला नहीं सकते, बाजार और शेयरधारकों के विश्वास को हिला नहीं सकते। लेकिन अगर मुकदमा कभी खत्म नहीं होने वाला है, तो हमें स्वतंत्रता के उस पहलू से मेल खाना होगा। 

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