राजधानी में सीलिंग की कार्रवाई को अंजाम दे रही कोर्ट की तरफ से गठित मॉनिटरिंग कमेटी को पुलिस संरक्षण न दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीलिंग की कार्रवाई में किसी तरह की रुकावट और कमेटी के साथ किसी तरह अभद्रता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए चेतावनी दी कि वह इस मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर से भी जवाब मांगने को मजबूर हो सकती है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की ओर से पेश वकील ने न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ से कहा कि कमेटी को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा रही है।
उन्होंने अमर कॉलोनी में कार्रवाई करने पहुंची कमेटी को उचित पुलिस संरक्षण न देने का आरोप लगाया। इस पर पीठ ने कहा कि अदालत के निर्देश पर मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है और अदालती निर्देश के तहत कार्रवाई की जा रही है।
लिहाजा उनके काम में किसी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए। कमेटी के सदस्यों को पर्याप्त पुलिस संरक्षण मिलना चाहिए। नाराज पीठ ने एक वक्त तो मामले में उपस्थिति वकील वसीम ए. कादरी को यहां तक कह दिया कि आप कृपया अपने पुलिस कमिश्नर को बुलाएं।
हालांकि बाद में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी पीठ के समक्ष पेश हुए और उन्होंने पीठ को आश्वस्त किया कि उनकी पुलिस कमिश्नर से बात हुई है और उन्होंने आश्वासन दिया है कि कमेटी के सदस्यों को पर्याप्त पुलिस संरक्षण मिलेगा। यदि कमेटी पहले से सूचना देगी तो संबंधित स्थान पर पर्याप्त प्रबंध किए जाएंगे। इसके बाद पीठ ने सुनवाई 16 अप्रैलत तक के लिए टाल दी।