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सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में जलेंगे 'ग्रीन पटाखे', 2 घंटे का समय तय करे राज्य सरकारः सुप्रीम कोर्ट

Tue, 30 Oct 2018 12:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिवाली - फोटो : self
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए आदेश में दिवाली पर जलाए जाने वाले पटाखों के समय और क्वालिटी पर दिए गए अपने आदेश में संशोधन किया है। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन पटाखे जलाने का आदेश सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के लिए है।

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इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि दो घंटे का जो समय तय किया गया है उस पर राज्य सरकारें नियम बनाएं। यह राज्य सरकारों को तय करना है कि कितने देर और किस समय पर दिवाली में पटाखे जलाए जाएं। अदालत ने कहा है कि तमिलनाडु, पुडुचेरी जैसे स्थानों पर पटाखे फोड़ने के लिए समय में बदलाव होगा, लेकिन यह अवधि दिन में दो घंटे से अधिक नहीं होगी। 

हालांकि अदालत ने कहा कि सिर्फ तमिलनाडु में ही दिवाली के दिन सुबह में पटाखे छोड़े जा सकेंगे। साथ ही कोर्ट ने पटाखों का स्टॉक 2 हफ्ते में खत्म करने की समय सीमा बढ़ाने से भी इनकार कर दिया है।
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23 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आतिशबाजी की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगाने से इनकार करते हुए कुछ शर्तों के साथ दीपावली पर पटाखे चलाने की छूट दे दी थी। फैसले में कहा गया था कि दीपावली पर रात 8 से 10 बजे तक केवल दो घंटे के लिए पटाखे चलाए जा सकते हैं। वहीं, देशभर में केवल कम प्रदूषण वाले पटाखे बनाए और बेचे जाएंगे। अदालत ने कहा कि अगर प्रतिबंधित पटाखों को बेचा जाता है तो संबंधित इलाके के थाना प्रभारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन पर अवमानना का मामला चलेगा।

जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने मंगलवार को दिए फैसले में फ्लिपकार्ट व अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के पटाखा बेचने पर रोक लगी दी है। कोर्ट ने कहा कि इन्हें लाइसेंस देना सीमा से बाहर है। अगर ई-कॉमर्स कंपनियां आदेश का पालन नहीं करेंगी तो उन पर अवमानना का मुकदमा चलाया जाएगा। 

पीठ ने कहा था कि बाजार में केवल अनुमोदित ध्वनि सीमा वाले पटाखों की बिक्री की अनुमति रहेगी। अब नए आदेश के बाद यह वाली बात सिर्फ दिल्ली-एनसीार पर लागू होगी। पटाखों की ध्वनि और धुएं की सीमा पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) तय करेगा। केंद्र से कहा कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिवाली व अन्य त्योहारों के दौरान सामुदायिक स्तर पर पटाखे चलाने को प्रोत्साहित किया जाए।

साथ ही राज्यों को भी त्योहारों के दौरान सामुदायिक रूप से पटाखे चलाने की कोशिशों पर विचार करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उस याचिका पर आया है, जिसमें वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पटाखों को बनाने और बेचने पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की गई थी।

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पीठ ने 28 अगस्त को सुरक्षित रखा था फैसला

पीठ ने 28 अगस्त को मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि याचिका पर विचार करते समय पटाखा उत्पादकों की आजीविका के मौलिक अधिकार और देश के 1.3 अरब लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार समेत विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। संविधान का अनुच्छेद-21 (जीवन का अधिकार) हर वर्ग पर लागू होता है। पटाखों पर देशव्यापी प्रतिबंध पर विचार करते समय संतुलन बरकरार रखने की जरूरत है। साथ ही केंद्र से प्रदूषण पर अंकुश के लिए उपाय सुझाने और यह बताने को कहा था कि पूर्ण प्रतिबंध से जनता पर क्या असर पड़ेगा।

निर्माताओं ने पूर्ण पाबंदी नहीं लगाई थी गुहार
आतिशबाजी निर्माताओं ने शीर्ष अदालत से कहा था कि पटाखों पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाई जानी चाहिए। इसकी जगह सख्ती से नियमन किया जाना चाहिए। उन्होंने दलील दी थी कि वायु प्रदूषण में वृद्धि के लिए सिर्फ पटाखे ही नहीं, बल्कि हवा, तापमान, धूल समेत कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। अगर रोक लगाई गई तो पटाखा निर्माता कारोबार के अधिकार से वंचित हो जाएंगे।

इन मौकों पर भी लागू रहेंगी शर्तें...
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य त्योहारों के साथ ही शादी समारोह और धार्मिक जलसों में भी पटाखों के जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की शर्तें...
- निर्देशों का पालन कराना एसएचओ की जिम्मेदारी होगी। उल्लंघन पर चलेगा अवमानना का मुकदमा।
- शीर्ष अदालत ने पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर लगाई रोक। बेचे तो कंपनी पर अवमानना का केस। 
- लाइसेंस प्राप्त दुकानदार ही बेच पाएंगे पटाखे। सिर्फ इको फ्रेंडली व कम प्रदूषण वाले पटाखे ही बेचें। 
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