एमसीडी अपने उप नियमों के अनुसार चूक करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जबकि राजस्व विभाग पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई करेगा। प्रवर्तन अभियान के दौरान जब्त किए गए एसयूपी आइटम को अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों (वेस्ट टू एनर्जी प्लांट) में जला दिया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे लैंडफिल या जल निकायों में बाधा उत्पन्न न करे। जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली सरकार राजधानी में इको-क्लब के सदस्यों को प्रशिक्षण देगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
दिल्ली में करीब दो हजार इको-क्लब हैं। प्रतिबंधित वस्तुओं में ईयरबड, गुब्बारे के लिए प्लास्टिक की छड़ें, झंडे, कैंडी की छड़ें, आइसक्रीम की छड़ें, पॉलीस्टाइनिन (थर्मोकोल), प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, पुआल, ट्रे, रैपिंग या पैकेजिंग फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट के पैकेट, प्लास्टिक या पीवीसी बैनर (100 माइक्रोन से कम) और स्टिरर शामिल है।
75 माइक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक कैरी बैग भी प्रतिबंधित
प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों के तहत 75 माइक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक कैरी बैग भी प्रतिबंधित हैं। इनकी मोटाई 31 दिसंबर से बढ़ाकर 120 माइक्रोन करनी होगी। वहीं, 50 माइक्रोन से कम मोटाई की प्लास्टिक रैपिंग सामग्री और तंबाकू, पान मसाला और गुटखा बेचने और भंडारण के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के पाउच की भी अनुमति नहीं है। दिल्ली में प्रतिदिन 1,060 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। राजधानी में कुल ठोस कचरे का एसयूपी 5.6 फीसदी (56 किलो प्रति मीट्रिक टन) होने का अनुमान है।