आंखों से नीचे पूरे शरीर पर सफेद पट्टियों से ढकी पत्नी रेखा को देखकर जितेंद्र चकरा गया। साथ में खड़े हरियाणा पुलिस के सिपाही मनोज ने जैसे-तैसे जितेंद्र को संभाला। रेखा ने जितेंद्र को ढांढस बंधाया और कहा कि ‘कुछ खा लो, ऐसे काम नहीं चलेगा। मैं ठीक हूं’।
सुनपेड़ गांव में अग्निकांड के बाद मंगलवार देर रात जितेंद्र ने पहली बार पत्नी रेखा से सफदरजंग अस्पताल के आईसीयू वार्ड में मुलाकात की। रेखा कई दिनों से पति और अपने बच्चों से मिलने की गुहार डॉक्टरों से लगा रही थी।
डॉक्टरों ने पहले ही जितेंद्र को पत्नी से ज्यादा बात न करने की सलाह दी और बच्चों की मौत के बारे में न बताने के लिए कहा। दिल पर पत्थर रख जितेंद्र आईसीयू में सिपाही मनोज कुमार के साथ दाखिल हुए।
एक सप्ताह बाद जब दोनों की मुलाकात हुई आंखें भर आईं। याद आ गया वो मंजर जो 20 अक्तूबर की रात को दोनों ने देखा। खड़े-खड़े जितेंद्र ने पत्नी रेखा के सिर पर हाथ फेरा और पूछा, कैसी हो।