सुनपेड़ गांव में 5 अक्तूबर 2014 की शाम हुए तिरहे हत्याकांड में सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंचन माही की अदालत ने चार दोषियों को उम्रकैद और एक अन्य को सात साल की सजा सुनाई है। जबकि घटना में शामिल रही दो महिलाओं को छह महीने से अधिक समय तक जेल में रहने के रिहा कर दिया गया।
महिलाओं को आईपीसी की धारा 323 के तहत आरोपी बनाया गया था। दोषियों को जुर्माना भी देना होगा। इस तिहरे हत्याकांड में पुलिस ने तत्कालीन सरपंच सहित 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। सुनपेड़ गांव निवासी रंभू सिंह के बेटे देशराज ने सदर पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि उसके भतीजे जोगिंदर का मोबाइल को लेकर विवाद हो गया था।
तत्कालीन सरपंच जगमाल के परिजनों ने उसके साथ मारमीट कर दी थी। जब जोगिंदर के परिजन देशराज, इंद्राज, मोहनलाल, करतार, नौनिहाल और भरत सिंह शिकायत दर्ज कराने पहुंचे तो सरपंच के परिजनों ने एकजुट होकर चाकू व अन्य धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। घटना में इंद्राज, मोहनलाल और भरतपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि देशराज, करतार और नौनिहाल गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्कालीन सरपंच जगमाल, बंसी, लखन, कल्लू, वेदप्रकाश, दलबीर, पवन, सतेंद्र, सुमित, लज्जावती और संतोष के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास व शस्त्र अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। अदालत ने सोमवार को वेदप्रकाश, दलबीर, सुमित और पवन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। वेदप्रकाश पर 10 हजार रुपए जुर्माना जबकि अन्य तीनों पर 15-15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
सतेंद्र को सात वर्ष की कैद और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। लज्जावती और संतोष को छह महीने तक जेल और एक-एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। दोषी लज्जावती और संतोष छह महीने से अधिक समय तक जेल में रह चुकी हैं, इसीलिए अदालत ने उन्हें अब रिहा कर दिया है।