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Delhi NCR News: ऑटो की स्टेयरिंग और घर की बागडोर की गाड़ी सरपट दौड़ा रहीं सुनीता

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(महिला बीट)
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-पति के बीमार होने के बाद 22 साल से ऑटो चलाकर घर चलाती हैं सुनीता
-मालवीय नगर की रहने वाली हैं, अब दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। इरादे मजबूत हों और मेहनत का जज्बा हो, तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, रास्ता खुद ब खुद बन जाता है। मालवीय नगर की रहने वाली सुनीता की कहानी इसी सच्चाई को बयां करती है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच सुनीता ने जो राह चुनी, वह आज समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

करीब 22 साल पहले जब सुनीता के पति काफी बीमार थे, उस वक्त परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई, तब सुनीता के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। उनके पति ऑटो चलाकर घर परिवार का गुजारा करते थे, लेकिन स्थित इतनी गंभीर हुई कि सुनीता ने मजबूरन उन्होंने ऑटो के स्टेयरिंग समेत घर की बागडोर भी अपने हाथ में ली। उस दौर में महिलाओं का ऑटो चलाना आम बात नहीं थी। समाज की नजरें, ताने और चुनौतियां हर कदम पर थीं, लेकिन सुनीता ने कभी हिम्मत नहीं हारी।
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सुनीता ने बताया कि शुरुआत में हालात बेहद मुश्किल थे। ऑटो चलाना सीखना, सड़कों पर घंटों मेहनत करना और घर की जिम्मेदारियां निभाना आसान नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने दिन-रात मेहनत की और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनीं। ऑटो की कमाई से उन्होंने न सिर्फ घर का खर्च चलाया, बल्कि परिवार को सहारा भी दिया। आज सुनीता अपने काम पर गर्व महसूस करती हैं। कई महिलाएं उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का हौसला जुटा रही हैं। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए संदेश है, जो परिस्थितियों से डर कर पीछे हट जाती हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत करने की लगन हो, तो कोई भी बाधा सपनों की राह नहीं रोक सकती।
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